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साल के अंत तक शुरू होगी ओबरा-सी परियोजना
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फोटो-ओबरा परियोजना के विशिष्ठ अतिथि गृह में अधिकारियों से वार्ता करते उत्पादन निगम के प्रबंध नि?
- फोटो : SONBHADRA
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प्रदेश की तापीय परियोजनाओं में गहराते कोयला संकट के बीच बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक पी. गुरुप्रसाद ने ओबरा परियोजना का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कोल यार्ड, वैगन ट्रिपलर व सेंट्रल स्टोर का स्थलीय निरीक्षण किया। 1320 मेगावाट की ओबरा सी तापीय परियोजना के दोनों यूनिटों के निर्माण कार्य और 200 मेगावाट की 13वीं इकाई के मरम्मत कार्य का भी हाल जाना। निरीक्षण के बाद बीटीपीएस के मीटिंग हाल में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने इस साल के अंत तक ओबरा-सी परियोजना चालू होने की उम्मीद जताई।
वीआईपी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि कोयले की कमी के कारण उत्पादन में दिक्कतें आ रही हैं। इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। इस मुद्दे पर बुधवार को अनपरा दौरे के दौरान एनसीएल के सीएमडी से वार्ता भी की गई है। ओबरा विद्युत परियोजना के लिए एनसीएल खदानों से कोयले की अधिक रैक बढ़ा कर भेजने पर एनसीएल के सीएमडी से सहमति बनी है। उन्होंने ओबरा सी परियोजना की 660 मेगावाट की पहली इकाई से वर्ष के अंत तक बिजली उत्पादन की उम्मीद जताई। बताया कि सफलतापूर्वक निर्माणाधीन 1320 मेगावाट की सी परियोजना के सभी तकनीकी पहलुओं की जांच जारी है। सब कुछ ठीक रहा वर्ष के अंत तक इसे लाइट अप कर दिया जाएगा। उन्होंने 4 मार्च 2018 से बंद चल रही 200 मेगावाट की 13वीं इकाई से भी जल्द बिजली उत्पादन होने की उम्मीद जताई। वार्ता के दौरान ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं. दीपक कुमार, महाप्रबंधक प्रशासन इं. जीके मिश्रा, महाप्रबंधक-बी इं. योगेश गुप्ता, महाप्रबंधक निर्माण ओबरा सी इं. पीसी अग्रवाल, उप महाप्रबंधक इं. एके राय, इं.समीर भटनागर आदि मौजूद रहे।
चार टाइम पानी का हो छिड़काव
ओबरा सी निर्माण स्थल से लेकर शारदा मंदिर तक बड़े वाहनों के आवागमन से उड़ रही धूल पर चिंता जाहिर करते हुए सीजीएम ओबरा इं. दीपक कुमार को निर्देश दिया कि चार टाइम बड़े टैंकरों से पानी का छिड़काव करें, ताकि आम लोगों को धूल से निजात मिल सके। बता दें कि स्कूल आने जाने वाले बच्चे समेत आम लोगों को डिग्री कॉलेज से शारदा मंदिर तक धूल फांकनी पड़ती है। कार्यदायी संस्था मेसर्स दुसान की ओर खानापूर्ति करने के लिए छोटे टैंकर से दिन में कभी कभी पानी का छिड़काव किया जाता है।
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वीआईपी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि कोयले की कमी के कारण उत्पादन में दिक्कतें आ रही हैं। इसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। इस मुद्दे पर बुधवार को अनपरा दौरे के दौरान एनसीएल के सीएमडी से वार्ता भी की गई है। ओबरा विद्युत परियोजना के लिए एनसीएल खदानों से कोयले की अधिक रैक बढ़ा कर भेजने पर एनसीएल के सीएमडी से सहमति बनी है। उन्होंने ओबरा सी परियोजना की 660 मेगावाट की पहली इकाई से वर्ष के अंत तक बिजली उत्पादन की उम्मीद जताई। बताया कि सफलतापूर्वक निर्माणाधीन 1320 मेगावाट की सी परियोजना के सभी तकनीकी पहलुओं की जांच जारी है। सब कुछ ठीक रहा वर्ष के अंत तक इसे लाइट अप कर दिया जाएगा। उन्होंने 4 मार्च 2018 से बंद चल रही 200 मेगावाट की 13वीं इकाई से भी जल्द बिजली उत्पादन होने की उम्मीद जताई। वार्ता के दौरान ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं. दीपक कुमार, महाप्रबंधक प्रशासन इं. जीके मिश्रा, महाप्रबंधक-बी इं. योगेश गुप्ता, महाप्रबंधक निर्माण ओबरा सी इं. पीसी अग्रवाल, उप महाप्रबंधक इं. एके राय, इं.समीर भटनागर आदि मौजूद रहे।
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चार टाइम पानी का हो छिड़काव
ओबरा सी निर्माण स्थल से लेकर शारदा मंदिर तक बड़े वाहनों के आवागमन से उड़ रही धूल पर चिंता जाहिर करते हुए सीजीएम ओबरा इं. दीपक कुमार को निर्देश दिया कि चार टाइम बड़े टैंकरों से पानी का छिड़काव करें, ताकि आम लोगों को धूल से निजात मिल सके। बता दें कि स्कूल आने जाने वाले बच्चे समेत आम लोगों को डिग्री कॉलेज से शारदा मंदिर तक धूल फांकनी पड़ती है। कार्यदायी संस्था मेसर्स दुसान की ओर खानापूर्ति करने के लिए छोटे टैंकर से दिन में कभी कभी पानी का छिड़काव किया जाता है।
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