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ओबरा सी : दूसरी इकाई की कोल फायरिंग प्रक्रिया शुरू
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ओबरा। ओबरा तापीय परियोजना के विस्तार में निर्माणाधीन 1320 मेगावाट की ओबरा सी परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता की दूसरी इकाई की कोल फायरिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शनिवार की रात इस प्रक्रिया के शुरू होने से अब जल्द दूसरी इकाई से बिजली उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।
किसी भी इकाई से बिजली उत्पादन से पूर्व यह प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कोल फायरिंग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अभियंताओं की तरफ से लगातार इकाई के सभी महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सों की जांच की जा रही है। साथ ही अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं.आरके अग्रवाल ने बताया कि कोल फायरिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इकाई को सिंक्रोनाइज कर लिया जाएगा। अभी इकाई के सभी तकनीकी हिस्से सही से काम कर रहे हैं। इकाई लाइटअप है और लगातार स्टीम बन रही है। उन्होंने बताया कि आगामी 10 फरवरी तक इकाई को सिंक्रोनाइज करने का लक्ष्य रखा गया है।
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क्या है कोल फायरिंग
किसी भी परियोजना के लिए कोल फायरिंग किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होती है। यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही इकाई विद्युत उत्पादन के लिए तैयार हो जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान इकाई को पहले आयल फायरिंग कर लाइटअप किया जाता है। इसके बाद कोल फायरिंग कर विद्युत उत्पादन शुरू किया जाता है।
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किसी भी इकाई से बिजली उत्पादन से पूर्व यह प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कोल फायरिंग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अभियंताओं की तरफ से लगातार इकाई के सभी महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सों की जांच की जा रही है। साथ ही अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं.आरके अग्रवाल ने बताया कि कोल फायरिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इकाई को सिंक्रोनाइज कर लिया जाएगा। अभी इकाई के सभी तकनीकी हिस्से सही से काम कर रहे हैं। इकाई लाइटअप है और लगातार स्टीम बन रही है। उन्होंने बताया कि आगामी 10 फरवरी तक इकाई को सिंक्रोनाइज करने का लक्ष्य रखा गया है।
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क्या है कोल फायरिंग
किसी भी परियोजना के लिए कोल फायरिंग किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होती है। यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इस प्रक्रिया के पूरा होते ही इकाई विद्युत उत्पादन के लिए तैयार हो जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान इकाई को पहले आयल फायरिंग कर लाइटअप किया जाता है। इसके बाद कोल फायरिंग कर विद्युत उत्पादन शुरू किया जाता है।
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