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बिना रिपोर्ट कॉर्ड दिए नहीं जारी होगा ग्रांट
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परिषदीय विद्यालयों में खिड़की-दरवाजे, कुर्सी मेज सहित अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए मिलने वाले ग्रांट की प्रक्रिया अब बदल गई है। ग्रांट लेने के लिए पहले स्कूल में क्या आवश्यक है इसकी रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करना होगा। इसकी रिपोर्ट खंड शिक्षाधिकारियों के जरिये सभी प्रधानाध्यापकों से मांगी गई है। रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत न करने वाले विद्यालयों को ग्रांट की धनराशि नहीं मिलेगी।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में कुर्सी, मेज व टेबल की खरीदारी, रंगाई-पोताई के लिए ग्रांट के तहत धन दिया जाता है। हालांकि बेसिक शिक्षा शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को मिलने वाले ग्रांट की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। पूर्व में विद्यालयों में नामांकित छात्रों की संख्या का आकलन करते हुए ग्रांट उपलब्ध कराया जाता था जिसके कारण कई बार ऐसी समस्या होती थी कि कई स्कूलों में धनराशि कम होने के कारण व्यवस्था ठीक तरीके से दुरुस्त नहीं हो पाती थी। इसको को देखते हुए शासन की ओर से ग्रांट जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों से रिपोर्ट मांगी गई है। निर्धारित दस बिंदुओं पर आवश्यक रिपोर्ट कार्ड तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए उपलब्ध धनराशि को खर्च करने को भी कहा गया है। कंपोजिट स्कूल ग्रांट की डिमांड भी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि वे ग्रांट का उपयोग समय रहते कर लें। डिमांड रिपोर्ट न देने वाले विद्यालय ग्रांट से वंचित रह जाएंगे।
इन बिंदुओं पर होंगे कार्य
जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को ग्रांट की धनराशि से विभिन्न कार्य कराने होंगे। जिसमें स्कूलों की हैंडवॉश यूनिट सुचारू रखना होगा। पानी की सप्लाई, टंकी की साफ-सफाई, छोटे-छोटे मरम्मत कार्य, शौचालय की साफ-सफाई, दरवाजों में सिटकनी लगवाना होगा। सबमर्सिबल के पास पक्का प्लेटफार्म, सोखता गड्ढा तैयार कराना होगा। वहीं टूटी हुई कुर्सी, मेज, झूला, ब्लैकबोर्ड, फर्श की टूट फूट दूर करानी होगी। वहीं विद्यालयों के गेट और कमरों के सभी दरवाजों पर डबल इंटरलॉकिंग के ताले लगवाने होंगे। जहां स्मार्ट क्लास का संचालन होना है, वहां दरवाजे लोहे के होंगे।
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सभी स्कूलों से ग्रांट के लिए डिमांड रिपोर्ट मांगी गई है। इस बार डिमांड के अनुसार ग्रांट की राशि जारी होगी। इस बदलाव से स्कूलों में सुविधाएं और भी बेहतर होगी। - हरिवंश कुमार, बीएसए।
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में कुर्सी, मेज व टेबल की खरीदारी, रंगाई-पोताई के लिए ग्रांट के तहत धन दिया जाता है। हालांकि बेसिक शिक्षा शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को मिलने वाले ग्रांट की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। पूर्व में विद्यालयों में नामांकित छात्रों की संख्या का आकलन करते हुए ग्रांट उपलब्ध कराया जाता था जिसके कारण कई बार ऐसी समस्या होती थी कि कई स्कूलों में धनराशि कम होने के कारण व्यवस्था ठीक तरीके से दुरुस्त नहीं हो पाती थी। इसको को देखते हुए शासन की ओर से ग्रांट जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों से रिपोर्ट मांगी गई है। निर्धारित दस बिंदुओं पर आवश्यक रिपोर्ट कार्ड तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए उपलब्ध धनराशि को खर्च करने को भी कहा गया है। कंपोजिट स्कूल ग्रांट की डिमांड भी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि वे ग्रांट का उपयोग समय रहते कर लें। डिमांड रिपोर्ट न देने वाले विद्यालय ग्रांट से वंचित रह जाएंगे।
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इन बिंदुओं पर होंगे कार्य
जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को ग्रांट की धनराशि से विभिन्न कार्य कराने होंगे। जिसमें स्कूलों की हैंडवॉश यूनिट सुचारू रखना होगा। पानी की सप्लाई, टंकी की साफ-सफाई, छोटे-छोटे मरम्मत कार्य, शौचालय की साफ-सफाई, दरवाजों में सिटकनी लगवाना होगा। सबमर्सिबल के पास पक्का प्लेटफार्म, सोखता गड्ढा तैयार कराना होगा। वहीं टूटी हुई कुर्सी, मेज, झूला, ब्लैकबोर्ड, फर्श की टूट फूट दूर करानी होगी। वहीं विद्यालयों के गेट और कमरों के सभी दरवाजों पर डबल इंटरलॉकिंग के ताले लगवाने होंगे। जहां स्मार्ट क्लास का संचालन होना है, वहां दरवाजे लोहे के होंगे।
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सभी स्कूलों से ग्रांट के लिए डिमांड रिपोर्ट मांगी गई है। इस बार डिमांड के अनुसार ग्रांट की राशि जारी होगी। इस बदलाव से स्कूलों में सुविधाएं और भी बेहतर होगी। - हरिवंश कुमार, बीएसए।