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Sonebhadra News: लापरवाही, मौत, हंगामा, अस्पताल सील... और फिर बंद कर दी फाइल
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सोनभद्र। मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे निजी अस्पतालों का नेटवर्क काफी मजबूत है। विभाग में ऊंची पैठ का लाभ लेकर वह खूब मनमानी कर रहे हैं, मगर उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
उपचार के दौरान मरीज की मौत होने या मामला बिगड़ने पर हंगामा होता है जांच की औपचारिकता निभाते हुए टीम गठित होती है। कमियां बताते हुए तात्कालिक रूप से अस्पताल को सील कर दिया जाता है। मामला ठंडा पड़ते ही कार्रवाई की फाइल भी बंद हो जाती है। नतीजा कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
जिले में 70 निजी अस्पताल-नर्सिंग होम और 36 क्लीनिक का पंजीयन है
। इससे इतर दाेगुने से ज्यादा अस्पताल व क्लीनिक का संचालन हो रहा है। ज्यादातर अस्पतालों में चिकित्सा सेवा को लेकर बनाए गए मानक दरकिनार हैं। यही कारण है कि अक्सर वहां इलाज में लापरवाही के कारण मरीज की मौत या हालत बिगड़ने के मामले उठते रहते हैं। हर बार हंगामा मचने पर टीम गठित होती है।
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आक्रोश शांत कराने के लिए अस्पताल को सील करते हुए नोटिस भी जारी की जाती है। कुछ मामलों में एफआईआर भी होता है, मगर कभी भी नौबत ठोस कार्रवाई तक नहीं आती। ऑफ द रिकार्ड इसका कारण कभी सियासी दबाव तो कभी पीड़ितों का मुकरना बताया जाता है।
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उपचार के दौरान मरीज की मौत होने या मामला बिगड़ने पर हंगामा होता है जांच की औपचारिकता निभाते हुए टीम गठित होती है। कमियां बताते हुए तात्कालिक रूप से अस्पताल को सील कर दिया जाता है। मामला ठंडा पड़ते ही कार्रवाई की फाइल भी बंद हो जाती है। नतीजा कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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जिले में 70 निजी अस्पताल-नर्सिंग होम और 36 क्लीनिक का पंजीयन है
। इससे इतर दाेगुने से ज्यादा अस्पताल व क्लीनिक का संचालन हो रहा है। ज्यादातर अस्पतालों में चिकित्सा सेवा को लेकर बनाए गए मानक दरकिनार हैं। यही कारण है कि अक्सर वहां इलाज में लापरवाही के कारण मरीज की मौत या हालत बिगड़ने के मामले उठते रहते हैं। हर बार हंगामा मचने पर टीम गठित होती है।
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आक्रोश शांत कराने के लिए अस्पताल को सील करते हुए नोटिस भी जारी की जाती है। कुछ मामलों में एफआईआर भी होता है, मगर कभी भी नौबत ठोस कार्रवाई तक नहीं आती। ऑफ द रिकार्ड इसका कारण कभी सियासी दबाव तो कभी पीड़ितों का मुकरना बताया जाता है।