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शैक्षिक पद्धति और गुणवत्ता सुधार को लेकर साझा किया अनुभव
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सोनभद्र। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से सोमवार को इमर्जिंग पेडागोजी विषयक पांच दिवसीय ऑनलाइन फ़ैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारम्भ हुआ। इस दौरान मुख्य अतिथि प्रो. दुर्ग सिंह चौहान ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की खूबियों और खामियों का उल्लेख कियाष कहा कि शिक्षकों को शिक्षा पद्धति की उचित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ताकि शिक्षक और छात्र के बीच की दूरियों को कम किया जा सके।
उन्होंने गुरुकुल पद्धति का उदाहरण देकर समझाया कि एक शिक्षक समाज व देश के उत्थान का मजबूत स्तंभ होता है। प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों मे उन्न्त शिक्षा प्रणाली विकसित करने मे सहायक होंगे। निदेशक प्रो. डीके त्रिपाठी व अधिष्ठाता डॉ. आमोद तिवारी ने कार्यक्रम को शैक्षिक सुधार से जोड़ते हुये संस्थान का एक महत्वपूर्ण कदम बताया। संयोजक डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों और आईआईटी के सुप्रसिद्ध प्रोफेसर कार्यक्रम मे शिक्षा पद्धति और ऑनलाइन शिक्षा के बारे मे सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेंगे। कार्यक्रम मे देश के विभिन्न संस्थानों से करीब दो सौ प्रोफेसर व शोध विद्यार्थियों ने इंटरनेट के माध्यम से रजिस्ट्रेशन किया है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. डीके त्रिपाठी निदेशक, डॉ. आमोद कुमार तिवारी मौजूद रहे। संचालन डॉ. उदय प्रताप सिंह और संयोजन डॉ. राज कुमार पटेल ने किया।
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उन्होंने गुरुकुल पद्धति का उदाहरण देकर समझाया कि एक शिक्षक समाज व देश के उत्थान का मजबूत स्तंभ होता है। प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों मे उन्न्त शिक्षा प्रणाली विकसित करने मे सहायक होंगे। निदेशक प्रो. डीके त्रिपाठी व अधिष्ठाता डॉ. आमोद तिवारी ने कार्यक्रम को शैक्षिक सुधार से जोड़ते हुये संस्थान का एक महत्वपूर्ण कदम बताया। संयोजक डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों और आईआईटी के सुप्रसिद्ध प्रोफेसर कार्यक्रम मे शिक्षा पद्धति और ऑनलाइन शिक्षा के बारे मे सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेंगे। कार्यक्रम मे देश के विभिन्न संस्थानों से करीब दो सौ प्रोफेसर व शोध विद्यार्थियों ने इंटरनेट के माध्यम से रजिस्ट्रेशन किया है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. डीके त्रिपाठी निदेशक, डॉ. आमोद कुमार तिवारी मौजूद रहे। संचालन डॉ. उदय प्रताप सिंह और संयोजन डॉ. राज कुमार पटेल ने किया।
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