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आदिवासी संस्कृति को बचाने की जरूरत
संवाददाता अमर उजाला सोनभद्र
Updated Sat, 21 Feb 2015 11:32 PM IST
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टाउन क्लब के मैदान पर शनिवार को आयोजित दो दिवसीय आदिवासी संम्मेलन का आगाज हुआ। मुख्य अतिथि प्रदेश सचिवालय के डिप्टी सचिव सत्य प्रकाश पंखा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति विश्व संस्कृति की जननी है।
आदिवासी समाज को संगठित होकर अपने धर्म, संस्कृति, इतिहास को बचाने के लिए आगे आने की जरूरत है। कहा कि आज के परिवेश में हमारा धर्म, इतिहास धीरे-धीरे लुप्त होता जा रहा है। जो एक चिंता का विषय है।
आदिवासी समाज के लोगों को अपनी पहचान को बनाए रखने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज को वर्तमान सरकार हक और उनके अधिकार न देकर उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
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उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में आरक्षण जनजाति समाज को मिलना चाहिए। कहा कि वन अधिकार कानून के तहत जंगल जमीन आदिवासीयों के अधिकारों का है। बावजूद इसके आदिवासी समाज के लोग अपनी मूलभूत समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र और आदिवासियों के विकास के लिए दुद्धी को जिला बनाने की आवश्यकता है, तभी विकास संभव होगा। आदिवासी संमेलन के संयोजक फौजदार सिंह परस्ते ने
कहा कि क्षेत्र के आदिवासी अपने हकों की मांग को लेकर शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज को बुलंद किया लेकिन आज तक कोई शासन ने ध्यान नहीं दिया।
इस मौके पर गोड़वाना महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अशर्फी सिंह परस्ते, हृदयनारायण टेकाम, फौजदार सिंह, धर्माआर्या, सुखराज नेटी, विद्यासागर पनिका, सुरेंद्र, रामप्यारे, परमेश्वर मौजूद रहे।
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आदिवासी समाज को संगठित होकर अपने धर्म, संस्कृति, इतिहास को बचाने के लिए आगे आने की जरूरत है। कहा कि आज के परिवेश में हमारा धर्म, इतिहास धीरे-धीरे लुप्त होता जा रहा है। जो एक चिंता का विषय है।
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आदिवासी समाज के लोगों को अपनी पहचान को बनाए रखने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज को वर्तमान सरकार हक और उनके अधिकार न देकर उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
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उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में आरक्षण जनजाति समाज को मिलना चाहिए। कहा कि वन अधिकार कानून के तहत जंगल जमीन आदिवासीयों के अधिकारों का है। बावजूद इसके आदिवासी समाज के लोग अपनी मूलभूत समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र और आदिवासियों के विकास के लिए दुद्धी को जिला बनाने की आवश्यकता है, तभी विकास संभव होगा। आदिवासी संमेलन के संयोजक फौजदार सिंह परस्ते ने
कहा कि क्षेत्र के आदिवासी अपने हकों की मांग को लेकर शासन-प्रशासन तक अपनी आवाज को बुलंद किया लेकिन आज तक कोई शासन ने ध्यान नहीं दिया।
इस मौके पर गोड़वाना महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अशर्फी सिंह परस्ते, हृदयनारायण टेकाम, फौजदार सिंह, धर्माआर्या, सुखराज नेटी, विद्यासागर पनिका, सुरेंद्र, रामप्यारे, परमेश्वर मौजूद रहे।