{"_id":"5e1e07f68ebc3e4b51755335","slug":"nawajat-sishu-sonbhadra-news-vns5052174102","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवजात शिशुओं को अस्पताल तक पहुंचाने वाले रेस्क्यू वैन बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवजात शिशुओं को अस्पताल तक पहुंचाने वाले रेस्क्यू वैन बंद
विज्ञापन
सोनभद्र। सरकार ने नवजात शिशुओं को पाये जाने पर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने केलिए रेस्क्यू वैन चलाया। रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति केंद्र से संचालित यह वैन फिलहाल पिछले चार माह से नहीं चल रही है। इससे कहीें भी नवजात शिशु मिल रहे हैं तो उन्हें रेस्क्यू वैन से लाने की व्यवस्था नहीं है। भुगतान के अभाव में वाहन के खड़ हो जाने से रेस्क्यू का कार्य प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं यहां तैनात स्टाफ को जून माह से मानदेय भी नहीं मिल रहा है।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग यूपी की ओर से महिलाओं व बच्चों की किसी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति केंद्र सोनभद्र संचालित है। इस केंद्र के तहत डायल 181 नंबर दिया गया है, जिसे डायल कर इधर-उधर छोड़े गए नवजात शिशुओं के बारे में जानकारी दी जाती है। इस पर आशा ज्योति केंद्र की कर्मी रेस्क्यू वैन लेकर संबंधित स्थल पर जाती हैं और उस वैन से बच्चों को लाकर अस्पताल में भर्ती कराती हैं। लेकिन पिछले करीब चार माह से यह केंद्र दुश्वारियों की मार झेल रहा है।
इस केंद्र में लगाया गया रेस्क्यू वैन पिछले चार माह से बंद है। यहां तक कि इसके ईंधन तक का बजट रोक दिया गया है। इस नाते नवजात बच्चों के पाये जाने पर बच्चों को अस्पताल ले जाने के लिए रेस्क्यू वैन की जगह एंबुलेंस का सहारा लिया जा रहा हे।
विज्ञापन
विज्ञापन
महिला एवं बाल कल्याण विभाग यूपी की ओर से महिलाओं व बच्चों की किसी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति केंद्र सोनभद्र संचालित है। इस केंद्र के तहत डायल 181 नंबर दिया गया है, जिसे डायल कर इधर-उधर छोड़े गए नवजात शिशुओं के बारे में जानकारी दी जाती है। इस पर आशा ज्योति केंद्र की कर्मी रेस्क्यू वैन लेकर संबंधित स्थल पर जाती हैं और उस वैन से बच्चों को लाकर अस्पताल में भर्ती कराती हैं। लेकिन पिछले करीब चार माह से यह केंद्र दुश्वारियों की मार झेल रहा है।
विज्ञापन
इस केंद्र में लगाया गया रेस्क्यू वैन पिछले चार माह से बंद है। यहां तक कि इसके ईंधन तक का बजट रोक दिया गया है। इस नाते नवजात बच्चों के पाये जाने पर बच्चों को अस्पताल ले जाने के लिए रेस्क्यू वैन की जगह एंबुलेंस का सहारा लिया जा रहा हे।
विज्ञापन