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जयकारे से देवी मंदिर गुंजायमान
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Thu, 30 Mar 2017 10:50 PM IST
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नवरात्र
- फोटो : amar ujala
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जिले भर में चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं ने मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की। जय माता दी के जयकारे से देवी मंदिर और आसपास के क्षेत्र गुंजायमान रहे। देवी मंदिरों में पूजन-अर्चन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
वहीं कलश स्थापना कर नौ दिनों तक व्रत रखने वाले व्रतियों के जरिए अथवा पुरोहितों के जरिए दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया गया। मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से अथवा पुरोहितों के जरिए कराने से घर में सुख-समृद्धि के साथ ही अमन-चैन बना रहता है। किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है।
मां भगवती का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा का है। माता के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा है। इन्हें सरस्वती का रूप माना जाता है। देवासुर संग्राम में देवी ने घंटे की नाद से अनेकानेक असुरों का दमन किया। चंद्रघंटा देवी इसकी आराध्य शक्ति हैं। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती हैं।
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राबर्ट्सगंज नगर के मेन चौक स्थित शीतला माता मंदिर, ब्रम्हनगर स्थित दुर्गा मंदिर, पूरब मोहाल स्थित सातो शीतला माता मंदिर, दंडइत बाबा मंदिर परिसर स्थित काली माता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, सांई मंदिर के बगल में दुर्गा मंदिर पर गुरुवार को सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। चोपन प्रतिनिधि के मुताबिक- मां काली मंदिर, दुर्गा मंदिर और मध्य प्रदेश के बार्डर पर स्थित मां कुंडवासिनी देवी मंदिर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
डाला प्रतिनिधि के मुताबिक- मां वैष्णो देवी मंदिर पर सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सादे पोशाक में पुलिस की तैनाती रही। इसी प्रकार से जिले भर में नवरात्र के दूसरे दिन चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई।
उधर ओबरा में नवरात्र के दूसरे दिन भी नगर सहित ग्रामीण अंचलों के मन्दिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गयी। नगर के शारदा मंदिर, हनुमान मंदिर, शीतला मंदिर, श्रीराम मंदिर, संकट मोचन मंदिर सहित जुगैल स्थित जिरही धाम, कूड़ाड़ी देवी आदि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया।
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वहीं कलश स्थापना कर नौ दिनों तक व्रत रखने वाले व्रतियों के जरिए अथवा पुरोहितों के जरिए दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया गया। मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से अथवा पुरोहितों के जरिए कराने से घर में सुख-समृद्धि के साथ ही अमन-चैन बना रहता है। किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है।
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मां भगवती का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा का है। माता के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा है। इन्हें सरस्वती का रूप माना जाता है। देवासुर संग्राम में देवी ने घंटे की नाद से अनेकानेक असुरों का दमन किया। चंद्रघंटा देवी इसकी आराध्य शक्ति हैं। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती हैं।
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राबर्ट्सगंज नगर के मेन चौक स्थित शीतला माता मंदिर, ब्रम्हनगर स्थित दुर्गा मंदिर, पूरब मोहाल स्थित सातो शीतला माता मंदिर, दंडइत बाबा मंदिर परिसर स्थित काली माता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, सांई मंदिर के बगल में दुर्गा मंदिर पर गुरुवार को सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। चोपन प्रतिनिधि के मुताबिक- मां काली मंदिर, दुर्गा मंदिर और मध्य प्रदेश के बार्डर पर स्थित मां कुंडवासिनी देवी मंदिर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
डाला प्रतिनिधि के मुताबिक- मां वैष्णो देवी मंदिर पर सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सादे पोशाक में पुलिस की तैनाती रही। इसी प्रकार से जिले भर में नवरात्र के दूसरे दिन चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई।
उधर ओबरा में नवरात्र के दूसरे दिन भी नगर सहित ग्रामीण अंचलों के मन्दिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गयी। नगर के शारदा मंदिर, हनुमान मंदिर, शीतला मंदिर, श्रीराम मंदिर, संकट मोचन मंदिर सहित जुगैल स्थित जिरही धाम, कूड़ाड़ी देवी आदि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया।