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धरातल पर बदल गया साडा का स्वरूप, कागज में अब भी वही

Tue, 15 Feb 2022 11:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Feb 2022 11:35 PM IST
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Nature of SADA has changed on the ground, still the same in paper
शक्तिनगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) को नया स्वरूप देने वाली नई महायोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। वैधता तिथि खत्म होने के करीब डेढ़ माह बाद भी नई महायोजना न आने से इस विशेष क्षेत्र में सुनियोजित विकास की उम्मीदों को झटका लगा है। मनमाने तरीके से निर्माण कार्य जोरों पर है। अतिक्रमण की शिकायतें लगातार बढ़ रही है। सबसे ज्यादा नुकसान राजस्व का हो रहा है। नई महायोजना में विकास शुल्क के रूप में साडा की आमदनी बढ़नी थी मगर अब भी पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी है।
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सोन नदी के दक्षिण में स्थित चोपन, डाला, ओबरा, रेणुकूट, अनपरा, शक्तिनगर सहित दुद्धी तहसील का समग्र क्षेत्र साडा के दायरे में है। एनसीएल, एनटीपीसी, राज्य विद्युत उत्पादन निगम, हिंडाल्को, सीमेंट फैक्ट्री, क्रशर प्लांट जैसे कई औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र में विकास की प्रक्रिया को सुनियोजित करने के मकसद से महायोजना बनाई गई थी। करीब 20 वर्ष पुरानी यह महायोजना दिसंबर 2021 तक ही प्रभावी थी। पिछले 20 वर्षों में इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल चुकी है। कई नए आवासीय क्षेत्र विकसित हुए हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या में इजाफा हुआ है जो निरंतर जारी है।
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उसके अनुसार महायोजना में बदलाव न होने से वहां पुरानी व्यवस्थाएं ही लागू हैं। बिजली, पानी, सीवर, सड़क आदि की व्यवस्था पुरानी आबादी की जरूरत के अनुसार ही हैं। नए निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराते समय विकास शुल्क भी पुरानी दरों के आधार पर लिया जाता है। वक्त के साथ हुए बदलाव को भांपते हुए इस वर्ष नई महायोजना में काफी बदलाव किया जाना है। नए आवासीय और व्यावसायिक इलाके चिह्नित करते हुए उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जानी है। नई आबादी की जरूरतों के आधार पर सुविधाएं मुहैया कराई जानी है। इसके मद्देनजर महायोजना बनाने में तेजी दिखाई गई थी। नवंबर 2021 तक ही इसे पूर्ण कर लेने का निर्देश था ताकि जनवरी से इसे लागू कर दिया जाए। इसके उलट आधा फरवरी बीतने के बाद भी नई महायोजना तैयार नहीं हो पाई है। महायोजना बना रही संस्था से भुगतान को लेकर पेच फंस गया है। प्राधिकरण की ओर से भुगतान न किए जाने से सर्वे के बाद से संस्था ने इसे अधर में छोड़ दिया है। महायोजना तैयार होने में देरी का असर इस क्षेत्र के विकास पर पड़ रहा है।
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बढ़ता जा रहा अतिक्रमण, अवैध निर्माण में तेजी
पुरानी महायोजना में जो क्षेत्र कृषि कार्य के लिए चिह्नित थे, वहां तेजी से नए आवासीय व व्यावसायिक निर्माण होते जा रहे हैं। भूमि का स्वरूप बदले बिना लोग धड़ल्ले से निर्माण करा रहे हैं। खाली जगहों पर जगह-जगह अतिक्रमण भी हो रहा है। औद्योगिक कार्य के लिए आरक्षित भूमि पर तमाम लोगों ने कब्जा कर पक्के निर्माण करा लिए हैं मगर विभाग इससे बेखबर है। रेणुकूट के खाड़पाथर इलाके में स्टांप पर अनुबंध के आधार पर जमीनों की खरीद-फरोख्त जारी है। इस क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों निर्माण हो गए हैं जो कागज में वैध नहीं हैं। पिछले दिनों जांच में इसकी पोल भी खुल चुकी है।
नगर की नई महायोजना भी खटाई में
साडा के साथ ही राबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र की महायोजना की वैधता भी 31 दिसंबर को खत्म हो चुकी है। नियमानुसार वैधता तिथि से पहले ही नई महायोजना की स्वीकृत हो जानी चाहिए मगर जिम्मेदारों की सुस्ती के चलते अब तक इस दिशा में कदम आगे नहीं बढ़ पाया है। दिसंबर में इसके लिए प्रारंभिक बैठक हुई थी। इसमें नई महायोजना बनाने का प्रस्ताव पारित करते हुए संस्था को चिह्नित किया गया। नगर का दायरा बढ़ाने की भी मंजूरी मिली है, मगर इसके बाद से चुनाव का एलान होने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

साडा की नई महायोजना के लिए सर्वे कार्य पूरा कर नामित संस्था को दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं। कार्य के सापेक्ष पर्याप्त भुगतान भी कर दिया गया है, लेकिन अब तक संस्था ने इसे तैयार नहीं किया है। अध्यक्ष की ओर से लगातार पत्राचार भी किया जा रहा है। फिलहाल पुरानी महायोजना से ही काम संचालित हो रहे हैं। - विवेक कुमार, जेई, साडा।
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