प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विकास नगर स्थित सेवाकेंद्र पर सात्विक आहार, विहार और विचार से नई पीढ़ी को संस्कारित करने वाली 51 माताओं को विश्व मातृत्व दिवस पर सम्मानित किया गया। सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी सुमन बहन ने कहा कि हमारे समाज में उत्पन्न हो रही अधिकांश समस्याओं का मूल कारण मानवीय मूल्यों के पतन के कारण उत्पन्न विसंगतियां हैं। इसके लिए हमें प्राचीन भारतीय संस्कृति की ओर लौटना होगा।
इस अवसर पर महिला चिकित्सक एवं साईं हॉस्पिटल की प्रबंध निदेशक डॉ. अनुपमा सिंह ने कहा कि मनुष्य में संस्कारों के निर्माण की प्रक्रिया माँ के गर्भ से ही प्रारंभ से ही हो जाती है। इसलिए बच्चों के श्रेष्ठ व्यक्तित्व के निर्माण के लिए माताओं को सात्विक आहार और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विंध्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजली विक्रम सिंह ने कहा कि माताओं को बच्चों के पालन्र-पोषण के प्रति अपने दायित्वों के प्रति विशेष रूप से सजग रहना चाहिए। प्रतिभा बहन ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली के स्थान पर आध्यात्मिक जीवन शैली अपनाकर भावी पीढ़ी में श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करना सशक्त भारत के नवनिर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ख्याति अग्रवाल ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान आर्या, अलका, कुमकुम, कुमारीश्री, नेहा, अदिति और वैष्णवी ने माताओं के सम्मान में गीतों पर नृत्य प्रस्तुत की। डॉ. हरींद्र ने संचालन किया। इस मौके पर सीता, सरोज, कविता, दीपशिखा आदि उपस्थित रहीं।