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साढ़े दस हजार से अधिक गरीब परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं
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सोनभद्र। जिले में 10748 परिवार ऐसे हैं जिनके पास राशन कार्ड ही नहीं है। कोरोना वायरस के फैलाव पर रोक के लिए घोषित लाकडाउन के दौरान प्रशासन ऐसे परिवारों को चिह्नित कर राशन व भोजन उपलब्ध करा रहा है। प्रशासन ऐसे अन्य परिवारों को भी चिह्नित करा रहा है, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, ताकि इस संकट की घड़ी में कोई भूखा न रहे।
लॉकडाउन के दौरान तमाम ऐसे परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें राशनकार्ड के अभाव में सरकार की तरफ से घोषित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस बीच प्रदेश सरकार की तरफ से जब यह आदेश आया कि कोरोना वायरस के फैलाव पर रोक के लिए घोषित लाकडाउन के दौरान कोई भी परिवार भूखा न सोने पाए, तो प्रशासन की सक्रियता और बढ़ गई।
इसी कड़ी में जिले में सभी आठ ब्लाकों में 10748 ऐसे परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिनके पास राशनकार्ड नहीं है। इनमें अकेले 3764 ऐसे जनजाति वर्ग के परिवार हैं, जिनके राशन कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं। इसी तरह से विभिन्न ग्राम पंचायतों में 3347 ऐसे और गरीब परिवार हैं जिनके राशन कार्ड नहीं बने हैं। यही नहीं, स्थानीय निवासी दिहाड़ी पर मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले 2391 ऐसे परिवार भी हैं, जिनके समक्ष लॉकडाउन के कारण दो जून की रोटी का संकट पैदा हो गया है। इनके पास भी राशनकार्ड की सुविधा नहीं है।
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इनके अलावा अन्य जनपदों व प्रांतों से यहां आकर दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले 1246 अन्य श्रमिक भी हैं, जिनके राशन कार्ड नहीं बन सके हैं। प्रशासन की तरफ से इन लोगों को चिह्नित कर सभी के आवेदन पत्र राशन कार्ड के लिए भरवाए जा रहे हैं। साथ ही इन लोगों को राशन किट व कम्युनिटी किचन के जरिए भोजन उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया गया है।
जिले के सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि चिह्नित किए गए सभी लोगों को राशन किट उपलब्ध कराई जा रही है। कम्युनिटी किचन के माध्यम से इन लोगों को भोजन भी उपलब्ध कराई जा रही है। इनके राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। अब तक करीब ढाई हजार लोगों के आवेदन पत्र राशन कार्ड बनाने के लिए भरवाए जा चुके हैं। अन्य लोगों के राशन कार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
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लॉकडाउन के दौरान तमाम ऐसे परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें राशनकार्ड के अभाव में सरकार की तरफ से घोषित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस बीच प्रदेश सरकार की तरफ से जब यह आदेश आया कि कोरोना वायरस के फैलाव पर रोक के लिए घोषित लाकडाउन के दौरान कोई भी परिवार भूखा न सोने पाए, तो प्रशासन की सक्रियता और बढ़ गई।
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इसी कड़ी में जिले में सभी आठ ब्लाकों में 10748 ऐसे परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिनके पास राशनकार्ड नहीं है। इनमें अकेले 3764 ऐसे जनजाति वर्ग के परिवार हैं, जिनके राशन कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं। इसी तरह से विभिन्न ग्राम पंचायतों में 3347 ऐसे और गरीब परिवार हैं जिनके राशन कार्ड नहीं बने हैं। यही नहीं, स्थानीय निवासी दिहाड़ी पर मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले 2391 ऐसे परिवार भी हैं, जिनके समक्ष लॉकडाउन के कारण दो जून की रोटी का संकट पैदा हो गया है। इनके पास भी राशनकार्ड की सुविधा नहीं है।
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इनके अलावा अन्य जनपदों व प्रांतों से यहां आकर दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले 1246 अन्य श्रमिक भी हैं, जिनके राशन कार्ड नहीं बन सके हैं। प्रशासन की तरफ से इन लोगों को चिह्नित कर सभी के आवेदन पत्र राशन कार्ड के लिए भरवाए जा रहे हैं। साथ ही इन लोगों को राशन किट व कम्युनिटी किचन के जरिए भोजन उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया गया है।
जिले के सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि चिह्नित किए गए सभी लोगों को राशन किट उपलब्ध कराई जा रही है। कम्युनिटी किचन के माध्यम से इन लोगों को भोजन भी उपलब्ध कराई जा रही है। इनके राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। अब तक करीब ढाई हजार लोगों के आवेदन पत्र राशन कार्ड बनाने के लिए भरवाए जा चुके हैं। अन्य लोगों के राशन कार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है।