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कफ सिरप: मास्टरमाइंड भोला को एक साल तक नहीं मिलेगी जमानत, पिट एनडीपीएस एक्ट की तैयारी; शुभम की तलाश

Fri, 17 Apr 2026 11:25 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 17 Apr 2026 11:25 PM IST
सार

Cough Syrup Case: डीएम बीएन सिंह के जरिये शासन के निरोधक प्राधिकारी को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इस पर शासन के प्राधिकारी ने मंजूरी जताते हुए 15 अप्रैल से एक वर्ष तक के लिए प्रभावी कर दिया। 

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Cough Syrup Case Mastermind Bhola Denied Bail for One Year Authorities Prepare to Invoke PIT-NDPS Act
कफ सिरप तस्करी का मास्टरमाइंड भोला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sonbhadra News: कफ सिरप की तस्करी के चर्चित मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरगना शुभम के पिता और मास्टरमाइंड भोला प्रसाद जायसवाल के खिलाफ पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई लागू कर दी है। इस कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक की ओर से जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे 15 अप्रैल को मंजूरी मिल गई। एसपी ने बताया कि यह कार्रवाई नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए एनएसए की तर्ज पर की जाती है, जिसके तहत अब आरोपी भोला प्रसाद जायसवाल को एक वर्ष तक जमानत नहीं मिल सकेगी।

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गौरतलब है कि भोला प्रसाद जायसवाल को एक दिसंबर को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही वह जेल में बंद है। जांच के दौरान सामने आया कि वाराणसी में उसकी करीब 36 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसे प्रशासन द्वारा कुर्क किया जा चुका है। इसके साथ ही कुर्क की गई संपत्ति को सरकारी संपत्ति के रूप में अधिग्रहित करने की प्रक्रिया भी जारी है।

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पुलिस ने की कार्रवाई

इस पूरे मामले की जांच कर रही एसआईटी ने पाया कि भोला प्रसाद जायसवाल कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी में लंबे समय से लिप्त रहा है और वह इस प्रकार के अपराध का अभ्यस्त अपराधी है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ‘शैली ट्रेडर्स’ के माध्यम से फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा किया गया था। इन फर्मों के जरिए फर्जी बिलिंग की जाती थी और उसी की आड़ में बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त कफ सिरप का काला कारोबार संचालित किया जा रहा था।

एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि एसआईटी ने पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए पूरी फाइल तैयार कर ली थी, जिसे डीएम बीएन सिंह के माध्यम से शासन के निरोधक प्राधिकारी को भेजा गया। शासन स्तर पर समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 15 अप्रैल से एक वर्ष की अवधि के लिए इसे प्रभावी कर दिया गया है। इस कार्रवाई को नशे के अवैध कारोबार पर सख्त प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।

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