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बैंकों में करेंसी की कमी से भुगतान में दिक्कत
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Thu, 24 Nov 2016 10:56 PM IST
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निकासी के लिए लोगों की बैंक में भीड़
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500-1000 के पुराने नोटों की बंदी के बाद करेंसी की किल्लत ने कई बैंक शाखाओं में भुगतान ठप करने की स्थिति पैदा कर दी है। तालाबंदी की स्थिति पैदा करनी शुरू कर दी है। खुद डीएम चंद्रभूषण सिंह ने आरबीआई को पत्र लिखकर पर्याप्त करेंसी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। ऐसा न होने पर कानून व्यवस्था प्रभावित होने की भी आशंका जताई है।
नोटबंदी के पंद्रह दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। जमा के साथ ही निकासी के लिए कतार तो काफी छोटी हो गई है, लेकिन बैंकों में रुपये की किल्लत जहां लोगों को रोजाना बैंकों का चक्कर लगाने के लिए बाध्य कर रही है। वहीं किसी बैंक में दो तो किसी में महज चार हजार का भुगतान कर किसी तरह कुछ दिन काम चलाने का अनुरोध किया जा रहा है।
हालत यह है कि एसबीआई की मुख्यालय और ऊर्जांचल की शाखाओं में तो खाताधारकों को एक दिन में दस हजार का भुगतान दे दिया जा रहा है लेकिन दूसरे बैंको को एसबीआई के करेंसी चेस्ट से इतनी कम रकम मिल रही है कि वह अपने खाताधारकों को महज दो से चार हजार ही भुगतान कर पा रहे हैं। यह भुगतान भी कब बंद हो जाएगा? कहना मुश्किल है। महज दो हजार की मिलती नोट अलग परेशानी खड़ी किए हुए है।
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बता दें कि 18 लाख आबादी वाले जिले में कुल 152 बैंक शाखाएं स्थित हैं। यहां औसतन रोजाना 50 करोड़ से एक अरब का भुगतान होता है लेकिन नोटबंदी ने जहां भुगतान को 15 से 20 करोड़ पर ला दिया है। वहीं चेक से होने वाले लेनदेन में भी गिरावट देखने को मिल रही है।
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नोटबंदी के पंद्रह दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। जमा के साथ ही निकासी के लिए कतार तो काफी छोटी हो गई है, लेकिन बैंकों में रुपये की किल्लत जहां लोगों को रोजाना बैंकों का चक्कर लगाने के लिए बाध्य कर रही है। वहीं किसी बैंक में दो तो किसी में महज चार हजार का भुगतान कर किसी तरह कुछ दिन काम चलाने का अनुरोध किया जा रहा है।
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हालत यह है कि एसबीआई की मुख्यालय और ऊर्जांचल की शाखाओं में तो खाताधारकों को एक दिन में दस हजार का भुगतान दे दिया जा रहा है लेकिन दूसरे बैंको को एसबीआई के करेंसी चेस्ट से इतनी कम रकम मिल रही है कि वह अपने खाताधारकों को महज दो से चार हजार ही भुगतान कर पा रहे हैं। यह भुगतान भी कब बंद हो जाएगा? कहना मुश्किल है। महज दो हजार की मिलती नोट अलग परेशानी खड़ी किए हुए है।
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बता दें कि 18 लाख आबादी वाले जिले में कुल 152 बैंक शाखाएं स्थित हैं। यहां औसतन रोजाना 50 करोड़ से एक अरब का भुगतान होता है लेकिन नोटबंदी ने जहां भुगतान को 15 से 20 करोड़ पर ला दिया है। वहीं चेक से होने वाले लेनदेन में भी गिरावट देखने को मिल रही है।