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एनटीपीसी रिहंद गेट पर लगाया जाम, प्रदर्शन
sonbhadra
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:11 PM IST
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एनटीपीसी रिहंद
- फोटो : sonbhadra
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बीजपुर। एनटीपीसी रिहंद गेट पर गुरुवार की रात जाम लगाकर बस संचालक समेत तमाम लोगों ने प्रदर्शन कर ट्रकों की तरह बसों का भी संचालन परियोजना के मार्ग से किए जाने की मांग की। बता दें कि बैढ़न-बीजपुर बाई पास मार्ग के खराब होने से ट्रकों से आए दिन भीषण जाम लग रहा था। इसके बाद परियोजना प्रशासन ने ट्रकों के आवासीय परिसर की सड़कों से संचालन की अनुमति दी लेकिन बसों का संचालन उक्त मार्ग से न कराए जाने पर लोगों में नाराजगी है।
बैढ़न तिराहे से सिरसोती बाईपास सड़क की हालत बालू लदे ट्रकों के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे किसी भी वाहनों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। दलदल में फंसने के कारण हर दिन सड़क खराब हो रही है। इससे आए दिन जाम लग जा रहा है। लोगों का कहना है कि एनटीपीसी रिहंद परियोजना बैढ़न तिराहा से सिरसोती तक विस्थापित ग्रामीणों के आवागमन के सुविधा को लेकर ग्रामीण रास्ता बनवाया है।
प्रबंधन द्वारा बोर्ड भी लगाया गया है कि भारी वाहनों का आवागमन वर्जित है लेकिन बीते गर्मी के दिनों सैकड़ों ट्रकों के बालू ढुलाई करने से सड़क उखड़ गई है। स्थानीय विस्थापितों ने लिखित शिकायत कर ट्रकों के आवागमन को बंद करवाने की मांग की थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के चल रहे ट्रक मालिकों के आगे विस्थापित ग्रामीणों की नहीं सुनी गई, बल्कि जिला पंचायत सदस्य ने पुनर्वास प्रथम के विस्थापितों को लेकर सड़क पर भी उतर गए थे।
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विस्थापित ग्रामीणों का हाल ट्रकों से उड़ने वाली धूल व कीचड़ से हाल बेहाल है। गुरुवार की रात्रि जाम लगने से प्रभावशाली ट्रक मालिकों के ट्रक परियोजना के अंदर से निकलने लगी तो भड़कें बसों के मालिकों ने स्वागत गेट पर जाम लगा दिया। उनका कहना था कि प्रबंधन को पत्र देकर अनुरोध किया तो अनसुना कर दिया गया। वहीं बालू व राख की ट्रकें परियोजना परिसर से जा रहे हैं।
आधे घंटे बस मालिकों के बवाल की सूचना पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक हरिश्चंद सरोज ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया। परियोजना के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय कार्यालय से जाम से निजात दिलाने के लिए मात्र एक दिन ही ट्रकों का संचालन किया गया था। कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी वाहन परिसर से नहीं गुजरेगा।
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बैढ़न तिराहे से सिरसोती बाईपास सड़क की हालत बालू लदे ट्रकों के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे किसी भी वाहनों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। दलदल में फंसने के कारण हर दिन सड़क खराब हो रही है। इससे आए दिन जाम लग जा रहा है। लोगों का कहना है कि एनटीपीसी रिहंद परियोजना बैढ़न तिराहा से सिरसोती तक विस्थापित ग्रामीणों के आवागमन के सुविधा को लेकर ग्रामीण रास्ता बनवाया है।
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प्रबंधन द्वारा बोर्ड भी लगाया गया है कि भारी वाहनों का आवागमन वर्जित है लेकिन बीते गर्मी के दिनों सैकड़ों ट्रकों के बालू ढुलाई करने से सड़क उखड़ गई है। स्थानीय विस्थापितों ने लिखित शिकायत कर ट्रकों के आवागमन को बंद करवाने की मांग की थी, लेकिन प्रभावशाली लोगों के चल रहे ट्रक मालिकों के आगे विस्थापित ग्रामीणों की नहीं सुनी गई, बल्कि जिला पंचायत सदस्य ने पुनर्वास प्रथम के विस्थापितों को लेकर सड़क पर भी उतर गए थे।
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विस्थापित ग्रामीणों का हाल ट्रकों से उड़ने वाली धूल व कीचड़ से हाल बेहाल है। गुरुवार की रात्रि जाम लगने से प्रभावशाली ट्रक मालिकों के ट्रक परियोजना के अंदर से निकलने लगी तो भड़कें बसों के मालिकों ने स्वागत गेट पर जाम लगा दिया। उनका कहना था कि प्रबंधन को पत्र देकर अनुरोध किया तो अनसुना कर दिया गया। वहीं बालू व राख की ट्रकें परियोजना परिसर से जा रहे हैं।
आधे घंटे बस मालिकों के बवाल की सूचना पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक हरिश्चंद सरोज ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया। परियोजना के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय कार्यालय से जाम से निजात दिलाने के लिए मात्र एक दिन ही ट्रकों का संचालन किया गया था। कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी वाहन परिसर से नहीं गुजरेगा।