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Sonebhadra News: स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया
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सोनभद्र। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिला अस्पताल परिसर में मानसिक स्वास्थ्य शिविर व जागरुकता गोष्ठी आयोजित हुई। कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता की थीम पर गोष्ठी में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को प्रेरित किया गया। इस दौरान 160 लोगों का स्क्रीनिंग कर उपचार किया गया।
एडीएम सहदेव मिश्र ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि गैर संचारी रोग बड़े संकट के रूप में हमारे बीच पैर पसार रहे हैं। इसमें मानसिक स्वास्थ्य बहुत बड़ी चुनौती है। समाज में मानसिक रोगों के विषय में जागरूकता की कमी है। इस कारण मानसिक रोगी समय से स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं पहुंच पाते हैं। व्यक्ति को अपनी जीवन शैली, रहन-सहन, खान-पान आदि में संतुलन लाकर परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की कला विकसित करनी होगी। हमें खुद को ही नहीं बल्कि दूसरों को भी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से निकालने में मदद करनी चाहिए। जो लोग मानसिक समस्या से चुप-चाप जूझ रहे हैं, उनकी सहायता करें। मनोचिकित्सक डाॅ. जितेश गुप्ता ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर पांचवां और भारत में हर सातवां व्यक्ति मानसिक समस्या से जूझ रहा है। हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। लंबे समय तक तनाव अवसाद का रूप ले लेता है, जो आत्महत्या का प्रमुख कारण बनता है। व्यक्ति को तनाव मुक्त रहना चाहिए, जिसके लिए नियमित व्यायाम एवं योगा जरूरी है। परिवार और कार्यस्थल पर खुलकर बातें करें। एडीएम ने कहा कि अत्यधिक चिंता या तनाव उत्पन्न करने वाले विचारों का मन में बार-बार आना व्यक्ति को मानसिक रोगों की तरफ ले जाता है। सीएमएस डाॅ. बी. सागर ने आभार जताया। इस मौके पर एसीएमओ डाॅ. जीएस यादव, डाॅ. गणेश प्रसाद, मनोचिकित्सक डाॅ. रिचा पांडेय, साइकाट्रिक सोशल वर्कर सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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एडीएम सहदेव मिश्र ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने कहा कि गैर संचारी रोग बड़े संकट के रूप में हमारे बीच पैर पसार रहे हैं। इसमें मानसिक स्वास्थ्य बहुत बड़ी चुनौती है। समाज में मानसिक रोगों के विषय में जागरूकता की कमी है। इस कारण मानसिक रोगी समय से स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं पहुंच पाते हैं। व्यक्ति को अपनी जीवन शैली, रहन-सहन, खान-पान आदि में संतुलन लाकर परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की कला विकसित करनी होगी। हमें खुद को ही नहीं बल्कि दूसरों को भी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से निकालने में मदद करनी चाहिए। जो लोग मानसिक समस्या से चुप-चाप जूझ रहे हैं, उनकी सहायता करें। मनोचिकित्सक डाॅ. जितेश गुप्ता ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर पांचवां और भारत में हर सातवां व्यक्ति मानसिक समस्या से जूझ रहा है। हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। लंबे समय तक तनाव अवसाद का रूप ले लेता है, जो आत्महत्या का प्रमुख कारण बनता है। व्यक्ति को तनाव मुक्त रहना चाहिए, जिसके लिए नियमित व्यायाम एवं योगा जरूरी है। परिवार और कार्यस्थल पर खुलकर बातें करें। एडीएम ने कहा कि अत्यधिक चिंता या तनाव उत्पन्न करने वाले विचारों का मन में बार-बार आना व्यक्ति को मानसिक रोगों की तरफ ले जाता है। सीएमएस डाॅ. बी. सागर ने आभार जताया। इस मौके पर एसीएमओ डाॅ. जीएस यादव, डाॅ. गणेश प्रसाद, मनोचिकित्सक डाॅ. रिचा पांडेय, साइकाट्रिक सोशल वर्कर सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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