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भूमि विवादों को जड़ से समाप्त करने की पहल तेज
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सोनभद्र। जिले में लगातार बढ़ रहे भूमि विवादों को जड़ से समाप्त करने को लेकर योगी सरकार गंभीर हो गई है। राजस्व प्रकरणों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला किया है। इसके तहत 12 दिसंबर से जिले में वरासत दर्ज करने का अभियान चलाया जाएगा। वरासत के उत्तराधिकारियों को उनके अधिकार सुलभ बनाने तथा वरासत को लेकर विवादित मामलों के निपटारे में मदद के दृष्टिकोण से सरकार ने यह फैसला लिया है। इससे वरासत दर्ज कराने में लगे लोगों को भी काफी सहूलियत मिलेगी। डीएम ने अभियान को सफल बनाने के लिए तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारियों को नोडल बनाया है।
बता दें कि जिले में भूमि संबंधित विवाद कम होने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं। सबसे अधिक राजस्व न्यायालयों में वरासत दर्ज करने से संबंधित मामले लंबित है। इसको गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने भू-अभिलेखों को अपडेट करने के संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। इसके तहत जिम्मेदार अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। आदेश के मुताबिक, वरासत दर्ज कराने के लिए लोगों को तहसील समेत अन्य सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों के यहां भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि राजस्व विभाग खुद विरासत दर्ज कराएगा। इसके लिए जवाबदेही भी तय की जाएगी। निर्धारित समयसीमा के भीतर वरासत दर्ज न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वरासत की कार्रवाई पूर्ण करने के बाद पैमाइश का भी अभियान चलेगा। शासन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, अभियान को सफलतापूर्वक संपादित करने के लिए राजस्व के विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिले स्तर पर अभियान को सफल बनाने के लिए डीएम को निर्देशित किया गया है। डीएम टीके शिबू ने राबर्र्ट्सगंज, ओबरा, दुद्वी और घोरावल तहसील प्रशासन को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने का निर्देश दिया है। उपजिलाधिकारी और तहसीलदार प्रत्येक राजस्व ग्राम के लिए संबंधित लेखपालों को अभियान को सफल बनाने के लिए निर्देशित कर दिया है। चेताया है कि अभियान को सफल बनाने में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जिले में 12 दिसंबर से वरासत दर्ज करने का अभियान चलाया जाएगा। वरासत के उत्तराधिकारियों को उनके अधिकार सुलभ बनाने तथा वरासत को लेकर विवादित मामलों के निपटारे में मदद के दृष्टिकोण से सरकार ने यह फैसला लिया है। जिलाधिकारी टीके शिबू ने अभियान का नोडल तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारियों को बनाया है। अभियान को सफल बनाने में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों केे खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - राकेश सिंह, अपर जिलाधिकारी, सोनभद्र।
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बता दें कि जिले में भूमि संबंधित विवाद कम होने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं। सबसे अधिक राजस्व न्यायालयों में वरासत दर्ज करने से संबंधित मामले लंबित है। इसको गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने भू-अभिलेखों को अपडेट करने के संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। इसके तहत जिम्मेदार अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। आदेश के मुताबिक, वरासत दर्ज कराने के लिए लोगों को तहसील समेत अन्य सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों के यहां भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि राजस्व विभाग खुद विरासत दर्ज कराएगा। इसके लिए जवाबदेही भी तय की जाएगी। निर्धारित समयसीमा के भीतर वरासत दर्ज न करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वरासत की कार्रवाई पूर्ण करने के बाद पैमाइश का भी अभियान चलेगा। शासन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, अभियान को सफलतापूर्वक संपादित करने के लिए राजस्व के विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिले स्तर पर अभियान को सफल बनाने के लिए डीएम को निर्देशित किया गया है। डीएम टीके शिबू ने राबर्र्ट्सगंज, ओबरा, दुद्वी और घोरावल तहसील प्रशासन को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने का निर्देश दिया है। उपजिलाधिकारी और तहसीलदार प्रत्येक राजस्व ग्राम के लिए संबंधित लेखपालों को अभियान को सफल बनाने के लिए निर्देशित कर दिया है। चेताया है कि अभियान को सफल बनाने में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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जिले में 12 दिसंबर से वरासत दर्ज करने का अभियान चलाया जाएगा। वरासत के उत्तराधिकारियों को उनके अधिकार सुलभ बनाने तथा वरासत को लेकर विवादित मामलों के निपटारे में मदद के दृष्टिकोण से सरकार ने यह फैसला लिया है। जिलाधिकारी टीके शिबू ने अभियान का नोडल तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारियों को बनाया है। अभियान को सफल बनाने में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों केे खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - राकेश सिंह, अपर जिलाधिकारी, सोनभद्र।
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