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सोनभद्र के 1957 के चुनाव में कांग्रेस की लहर में भी यहां जला था जनसंघ का दीपक

Thu, 20 Jan 2022 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jan 2022 11:36 PM IST
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In the 1957 election of Sonbhadra, the Jana Sangh's lamp was lit here even in the Congress wave
आदिवासी बहुल जिले के मतदाताओं का मिजाज शुरू से ही लहरों के विपरीत चलने का रहा है। वर्ष 1957 का चुनाव भी इसका गवाह रहा। पूरे देश-प्रदेश में जब कांग्रेस की लहर थी, तब भी राबर्ट्सगंज सीट जनसंघ के दीपक से आलोकित हुई थी। बड़हर के राजा आनंद ब्रह्म शाह और शोभनाथ जनसंघ के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई थी। खास बात रही कि चुनाव में 80 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। यह अब तक को सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत है।
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पहले चुनाव लोगों के लिए लोकतंत्र का उत्सव होता था। लिहाजा हर कोई इसमें शामिल होने की इच्छा रखता था। मुल्क की आजादी के बाद वर्ष 1952 में हुए पहले चुनाव में 58 प्रतिशत से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। जागरुकता बढ़ी तो अगले ही चुनाव में यह मतदान प्रतिशत बढ़कर 81 फीसदी तक पहुंच गया। यह सीट तक सिर्फ रार्बट्सगंज के नाम से हो गई थी। फरवरी 1957 में हुए इस चुनाव में भी एक सीट से दो उम्मीदवारों को चुनने की परंपरा थी। सामान्य वर्ग की सीट पर भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी आनंद ब्रह्म शाह ने 36952 वोट पाकर जीत पाई थी, जबकि सुरक्षित सीट पर जनसंघ के ही शोभनाथ को 26077 वोट हासिल हुए थे। इस चुनाव में कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे। कांग्रेस के निवर्तमान विधायक रहे ब्रजभूषण मिश्र ग्रामवासी और रामस्वरूप को करारी शिकस्त खानी पड़ी थी।
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