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दुष्कर्म के दोषी 20 साल की कैद, 25 हजार का अर्थदंड भी
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चोपन थाना क्षेत्र में दर्ज किशोरी से दुष्कर्म के पांच साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने दोषी को 20 वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह धनराशि जमा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भी भुगतनी होगी। इस मामले में कोर्ट ने पुलिस की विवेचना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विवेचक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए डीजीपी को आदेशित किया है। आदेश की प्रति डीजीपी मुख्यालय को भेजी गई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने चोपन थाने में 25 अप्रैल 2016 को मुकदमा दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि 14 वर्षीय बेटी 23 अप्रैल को गांव में आई बरात देखकर देर रात घर लौट रही थी। उसे अकेला देख रास्ते में कोटा निवासी रामनारायण पनिका ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बेटी की चीख सुनकर मां मौके पर आई तो आरोपी वहां से फरार हो गया। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुना। आरोपी रामनारायण को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 20 वर्ष की कैद और 25000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को नियमानुसार मिलेगी। कोर्ट ने मामले के विवेचक इंस्पेक्टर रविंद्र भूषण मौर्य को पीड़िता की उम्र की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए स्कूल से कोई जानकारी न लेने को घोर लापरवाही मानते हुए विवेचक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को भेजा है। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी अधिवक्ता दिनेश अग्रहरि और सत्य प्रकाश त्रिपाठी एडवोकेट ने बहस की।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने चोपन थाने में 25 अप्रैल 2016 को मुकदमा दर्ज कराया था। उसका आरोप था कि 14 वर्षीय बेटी 23 अप्रैल को गांव में आई बरात देखकर देर रात घर लौट रही थी। उसे अकेला देख रास्ते में कोटा निवासी रामनारायण पनिका ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बेटी की चीख सुनकर मां मौके पर आई तो आरोपी वहां से फरार हो गया। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुना। आरोपी रामनारायण को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 20 वर्ष की कैद और 25000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को नियमानुसार मिलेगी। कोर्ट ने मामले के विवेचक इंस्पेक्टर रविंद्र भूषण मौर्य को पीड़िता की उम्र की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए स्कूल से कोई जानकारी न लेने को घोर लापरवाही मानते हुए विवेचक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को भेजा है। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी अधिवक्ता दिनेश अग्रहरि और सत्य प्रकाश त्रिपाठी एडवोकेट ने बहस की।
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