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पूरक रोजगार के लिए रेशम कीट उत्पादन में असीम संभावनाएं-निदेशक

Mon, 22 Aug 2022 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 11:57 PM IST
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Immense possibilities in silkworm production for supplementary employment: Director
केंद्रीय रेशम बोर्ड वस्त्र मंत्रालय की ओर से संचालित केंद्रीय टसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के तत्वाधान में राज्य स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम में सोमवार को किया गया। कार्यशाला में वैज्ञानिक तरीके से टसर उत्पादन के फायदे बताए गए। अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय रेशम बोर्ड के निदेशक डॉ. बी सत्यनारायण ने कहा कि सोनभद्र का भौगोलिक वातावरण रेशम कीट उत्पादन के लिए अनुकूल है।
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उन्होंने कहा कि किसान भाई खेती करते हुए इसे पूरक रोजगार की तरह आर्थिक आमदनी का जरिया बनाए। इससे पलायन भी रुकेगा और आप शान से स्वावलंबी जीवन जी सकते है। मुख्य अतिथि वन विभाग की एसडीओ उषा देवी ने किसानों का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक जानकारी हासिल कर कीट उत्पादन करें। बीएचयू के वैज्ञानिक आलोक पांडेय, खंड विकास अधिकारी नीरज तिवारी, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विवेक सरोज, सहायक निदेशक रेशम डॉ. रनबीर सिंह आदि ने वैज्ञानिक विधि से रेशम कीट उत्पादन पर जोर देते हुए नई तकनीकी, समय पर कीट लगाने उसकी देखरेख की विस्तार से जानकारी दी। किसानों के सवालों के जवाब में वैज्ञानिकों ने बताया कि रेशम का कपड़ा शरीर के लिए लाभदायक है। वह गर्मी में ठंडा और ठंडी में गर्म रखने वाला वस्त्र है। शुभा प्रेम ने आश्रम की गतिविधियों की जानकारी दी। रेशम विभाग के पंकज सिंह ने स्वागत किया। इस मौके पर विमल भाई, डॉ. अजय कुमार, केवला दुबे, एके राव, डॉ. जगत ज्योति, देवनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।
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