{"_id":"6223a86c6c99e9559d3c03d4","slug":"if-treatment-is-to-be-done-in-the-hospital-then-investigation-will-have-to-be-done-from-outside-sonbhadra-news-vns641864841","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में गर्भवती का कराना है इलाज तो बाहर से करानी होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में गर्भवती का कराना है इलाज तो बाहर से करानी होगी जांच
विज्ञापन
लोढ़ी स्थित 100शैय्या युक्त मातृ शिशु स्वास्थ्य विंग सोनभ्ज्ञद्र
- फोटो : SONBHADRA
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए स्थापित 100 शैय्या के मातृ शिशु केंद्र में बेहतर सुविधाओं का दावा छलावा साबित हो रहा है। बीते कुछ दिनों में यहां दो महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसमें परिजनों की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया गया। वहीं अस्पताल में शनिवार और रविवार को इलाज के लिए जाने वालों को बाहर से जांच के लिए कहा जाता है।
अस्पताल में उपचार कराने आने वालों को आए दिन दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कुछ ऐसा ही वाकया शनिवार को भी देखने को मिला, जब चतरा ब्लाक के निसोगी गांव निवासी 23 वर्षीय निशा यादव के परिजन उन्हें प्रसव के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। उन्हें 100 शैय्या के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई भेज दिया गया। जब परिजन गर्भवती को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां महिला चिकित्सक ने उन्हें शनिवार और रविवार को अस्पताल में जांच का नियम और सुविधा न होने की बात करते हुए बाहर से अल्ट्रासाउंड, सीबीसी, एचआईवी, एचबीएस, यूएसजी सहित अन्य जांच कराकर आने की बात कही। यह भी बताया कि जांच करा कर आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उन्हें भर्ती किया जाएगा या नहीं। वहीं दूसरी ओर प्रसव के लिए आई पीड़िता दर्द से परेशान रही। अस्पताल के इस व्यवहार से दुखी परिजन निराश होकर उसे कहीं अन्य ले गए। पीड़िता के पति बाबूलाल ने बताया कि अस्पताल का व्यवहार निंदनीय है। उन्होंने सीएमओ से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल में शनिवार और रविवार को जांच बंद होने का कोई नियम नहीं है। किस कारण से ऐसा हो रहा है। जानकारी ली जाएगी। -डॉ. क्रांति कुमार, सीएमएस जिला संयुक्त चिकित्सालय
विज्ञापन
विज्ञापन
अस्पताल में उपचार कराने आने वालों को आए दिन दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। कुछ ऐसा ही वाकया शनिवार को भी देखने को मिला, जब चतरा ब्लाक के निसोगी गांव निवासी 23 वर्षीय निशा यादव के परिजन उन्हें प्रसव के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। उन्हें 100 शैय्या के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई भेज दिया गया। जब परिजन गर्भवती को लेकर अस्पताल पहुंचे तो वहां महिला चिकित्सक ने उन्हें शनिवार और रविवार को अस्पताल में जांच का नियम और सुविधा न होने की बात करते हुए बाहर से अल्ट्रासाउंड, सीबीसी, एचआईवी, एचबीएस, यूएसजी सहित अन्य जांच कराकर आने की बात कही। यह भी बताया कि जांच करा कर आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उन्हें भर्ती किया जाएगा या नहीं। वहीं दूसरी ओर प्रसव के लिए आई पीड़िता दर्द से परेशान रही। अस्पताल के इस व्यवहार से दुखी परिजन निराश होकर उसे कहीं अन्य ले गए। पीड़िता के पति बाबूलाल ने बताया कि अस्पताल का व्यवहार निंदनीय है। उन्होंने सीएमओ से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
अस्पताल में शनिवार और रविवार को जांच बंद होने का कोई नियम नहीं है। किस कारण से ऐसा हो रहा है। जानकारी ली जाएगी। -डॉ. क्रांति कुमार, सीएमएस जिला संयुक्त चिकित्सालय
विज्ञापन