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Sonebhadra News: 200 लीटर टेलीफास से 1400 गांवों में कैसे होगी मच्छरों की रोकथाम
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जिले में मलेरिया, डेंगू सहित अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग और पंचायतीराज विभाग के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिले में एक ओर जहां पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई है। तो दूसरी ओर छिड़काव में भी खानापूर्ति की जा रही है।
सोनभद्र जिला मच्छर जनित बीमारियों के लिए टॉप चार में शामिल हैं। जिले में हर साल मच्छर जनित बीमारियां पैर पसारती हैं, मगर मलेरिया विभाग इनसे लोगों का पूरी तरह से बचाव नहीं कर पाता है। नगर से लेकर गांवों तक मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। लोग, बीमार हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग और पंचायती राज विभाग संचारी रोग नियंत्रण अभियान भी चला रहा है, लेकिन काम सिर्फ कागजों पर ही दिखता है। अस्पताल से लेकर ग्रामीण इलाकों में गंदगी की भरमार है। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से मलेरिया विभाग अनजान है।
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विभाग का दावा है कि मलेरिया विभाग की ओर से डीपीआरओ कार्यालय को मच्छर रोधी दवाएं उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी दस ब्लॉकों को 20-20 लीटर टेमीफास और 15-15 किलो बीटीआई पाउडर उपलब्ध कराया गया है।
जो पर्याप्त नहीं हैं। जिले में 624 ग्राम पंचायतें हैं। जिसमें चौदह सौ से अधिक गांव हैं। हालांकि ऐसे में एक गांव में डेढ़ सौ एमएल भी टेमीफास उपलब्ध नहीं कराया गया है। कुछ ऐसी ही स्थिति बीटीआई पाउडर की भी है। इससे गांवाें में मच्छर जनित रोगों के बचाव के लिए दवाओं के छिड़काव की स्थिति समझी जा सकती है।
अधिकारी देते हैं दबाव
जिले के काफी संख्या में ग्राम पंचायतों में मच्छर रोधी दवा का छिडकाव नहीं हुआ है। हालाकि पंचायती राज विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि दवाएं पंचायत स्तर पर उपलब्ध करा दी गई है। हालांकि घोरावल क्षेत्र के तीन ग्राम प्रधानों ने बताया कि उनके ग्राम पंचायत में दवा नहीं मिली है। मामला सामने न आए ऐसे में उनपर दबाव बनाया जा रहा है।
विभाग के आकड़ों में झोल
स्वास्थ्य विभाग जहां प्रत्येक ब्लॉक में 20 लीटर टेमीफास और 15 किलो बीटीआई पाउडर देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि हकीकत अलग है। चोपन एडीओ पंचायत काशी राम ठाकुर ने बताया कि विकास खंड में कुल 36 ग्राम पंचायताें के लिए 15 लीटर एंटी लार्वा मिला है। ऐसे में दावों और वास्तविकता में अंतर है।
चतरा ब्लाक क्षेत्र के गांवों में इन दिनों बारिश की वजह से मच्छरों का प्रकोप देखा जा रहा है। एडीओ पंचायत ने बताया कि महत 15 लीटर की एंटी लार्वा दवा मिली है। बताते चलें कि 60 ग्राम पंचायतों में कुल 179 राजस्व गांव है। ऐसे में छिड़काव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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सोनभद्र जिला मच्छर जनित बीमारियों के लिए टॉप चार में शामिल हैं। जिले में हर साल मच्छर जनित बीमारियां पैर पसारती हैं, मगर मलेरिया विभाग इनसे लोगों का पूरी तरह से बचाव नहीं कर पाता है। नगर से लेकर गांवों तक मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। लोग, बीमार हो रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग और पंचायती राज विभाग संचारी रोग नियंत्रण अभियान भी चला रहा है, लेकिन काम सिर्फ कागजों पर ही दिखता है। अस्पताल से लेकर ग्रामीण इलाकों में गंदगी की भरमार है। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से मलेरिया विभाग अनजान है।
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विभाग का दावा है कि मलेरिया विभाग की ओर से डीपीआरओ कार्यालय को मच्छर रोधी दवाएं उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी दस ब्लॉकों को 20-20 लीटर टेमीफास और 15-15 किलो बीटीआई पाउडर उपलब्ध कराया गया है।
जो पर्याप्त नहीं हैं। जिले में 624 ग्राम पंचायतें हैं। जिसमें चौदह सौ से अधिक गांव हैं। हालांकि ऐसे में एक गांव में डेढ़ सौ एमएल भी टेमीफास उपलब्ध नहीं कराया गया है। कुछ ऐसी ही स्थिति बीटीआई पाउडर की भी है। इससे गांवाें में मच्छर जनित रोगों के बचाव के लिए दवाओं के छिड़काव की स्थिति समझी जा सकती है।
अधिकारी देते हैं दबाव
जिले के काफी संख्या में ग्राम पंचायतों में मच्छर रोधी दवा का छिडकाव नहीं हुआ है। हालाकि पंचायती राज विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि दवाएं पंचायत स्तर पर उपलब्ध करा दी गई है। हालांकि घोरावल क्षेत्र के तीन ग्राम प्रधानों ने बताया कि उनके ग्राम पंचायत में दवा नहीं मिली है। मामला सामने न आए ऐसे में उनपर दबाव बनाया जा रहा है।
विभाग के आकड़ों में झोल
स्वास्थ्य विभाग जहां प्रत्येक ब्लॉक में 20 लीटर टेमीफास और 15 किलो बीटीआई पाउडर देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि हकीकत अलग है। चोपन एडीओ पंचायत काशी राम ठाकुर ने बताया कि विकास खंड में कुल 36 ग्राम पंचायताें के लिए 15 लीटर एंटी लार्वा मिला है। ऐसे में दावों और वास्तविकता में अंतर है।
चतरा ब्लाक क्षेत्र के गांवों में इन दिनों बारिश की वजह से मच्छरों का प्रकोप देखा जा रहा है। एडीओ पंचायत ने बताया कि महत 15 लीटर की एंटी लार्वा दवा मिली है। बताते चलें कि 60 ग्राम पंचायतों में कुल 179 राजस्व गांव है। ऐसे में छिड़काव का अंदाजा लगाया जा सकता है।