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Sonebhadra News: कैसे हो पढ़ाई, 129 स्कूलों में शिक्षक नहीं, 708 में सिर्फ 1 शिक्षक

Sun, 30 Jun 2024 01:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2024 01:00 AM IST
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How is education, there are no teachers in 129 schools, only 1 teacher in 708
सोनभद्र। बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत परिषदीय स्कूल लंबी छुट्टियों के बाद खुल गए हैं। बच्चों का आना भी शुरू हो गया है, लेकिन पठन-पाठन की व्यवस्था अभी भी भगवान भरोसे ही है। जिले के 129 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है। वहीं 708 स्कूल ऐसे हैं, जो सिर्फ 1 शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। इन स्कूलों में पढ़ाई का जिम्मा अनुदेशक और शिक्षा मित्र ही निभा रहे हैं।
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नीति आयोग का आकांक्षी जिला सोनभद्र बुनियादी शिक्षा के मामले में पीछे हैं। यहां के 2061 स्कूलों में गुणवत्ता पूर्ण पठन-पाठन के लिए करीब दस हजार शिक्षकों की जरूरत है। इसकी तुलना में महज 4200 शिक्षक ही तैनात हैं। इसमें भी 28 शिक्षक पिछले सत्र में रिटायर हो गए। स्कूलों में छात्र-शिक्षक के अनुपात का बुरा हाल है। आरटीई के मानकों के तहत प्राथमिक में 30 और पूर्व माध्यमिक 35 बच्चों पर एक शिक्षक होने चाहिए। इसके उलट जिले में कहीं 100 बच्चों को एक शिक्षक पढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों की संख्या इससे भी अधिक है। जिले में 129 विद्यालय ऐसे हैं, जहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक (नियमित शिक्षक) ही नहीं है। इन स्कूलों का ताला खोलवाने के लिए आसपास के दूसरे विद्यालय के शिक्षक को जिम्मेदारी दी गई है। बच्चों की पढ़ाई सिर्फ शिक्षा मित्र और अनुदेशक करा रहे हैं। वहीं 708 स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक-एक शिक्षक ही तैनात हैं। यह शिक्षक भी विभागीय कार्यों और अभिलेखों को दुरुस्त करने में ही उलझे रहते हैं। लिहाजा यहां भी पढ़ाई प्रभावित है। अंतर जनपदीय तबादले के तहत पिछले साल करीब एक हजार कोर्ट के आदेश पर अन्य जिलों में चले गए, जबकि महज 29 ही यहां आए। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात और भी बिगड़ गया है। विभाग की ओर से नामांकन बढ़ाने और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का अभियान तो चलाया जा रहा, मगर शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो रही।
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तैनाती में असमानता से भी बिगड़ी स्थिति

जिले में एक तरफ शिक्षकों की कमी है तो दूसरी ओर उनकी तैनाती में असमानता भी गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन में बड़ी बाधा है। हाल यह है कि नगरीय क्षेत्रों और सड़क किनारे स्थित विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक हैं तो दूसरी ओर दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षक ही नहीं है। रेणुकूट, अनपरा, रॉबर्ट्सगंज, चोपन, अनपरा जैसे नगरीय क्षेत्रों के स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात का हवाला देते हुए तैनाती दी गई है, मगर दूसरे क्षेत्रों में स्कूल खोलने के लिए भी शिक्षक नहीं है।
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वर्जन...

12460 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में से 73 नए शिक्षक जिले को मिले हैं। इन्हें बंद व एकल अध्यापकीय विद्यालयों पर ही भेजा जा रहा है। इसके अलावा जिले के अंदर भी समायोजन के निर्देश शासन से मिल चुके हैं। जहां भी शिक्षक अधिक होंगे, वहां से उन्हें जरूरत वाले दूसरे स्कूलों पर भेजा जाएगा।

-नवीन कुमार पाठक, बीएसए।
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