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Sonebhadra News: उपेक्षा के मकड़जाल में धरोहरें हो रहीं बदहाल

Sat, 18 Nov 2023 10:43 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 18 Nov 2023 10:43 PM IST
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Heritage sites are deteriorating due to neglect
सोनभद्र। जिले के ऐतिहासिक स्थलों की विरासत को संरक्षित रखने के लिए हर साल 18 से 25 नवंबर तक विश्व धरोहर सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना होता है कि हम अपनी सांस्कृतिक पहचान वाली पुरातन महत्व की धरोहरों को संजोकर रखें। आदिवासी बहुल जिले में कई पुरातन महत्व के स्थल हैं, लेकिन इनका संरक्षण नहीं हो रहा। यहां महज पुरातत्व विभाग और पर्यटन के बोर्ड लगा दिए गए हैं। कागजों में ही संरक्षण किया जा रहा है। जिले को पहचान दिलाने वाले प्राचीन स्थलों को संरक्षित करने के लिए न तो कोई मजबूत कार्ययोजना बनती दिख रही है और न तो इनके सौंदर्यीकरण का काम हो रहा है।
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शैलचित्र वाली गुफाओं में मांस और दारू की पार्टी

पंचमुखी पहाड़ी पर गुफा व शैलचित्रों की बड़ी शृंखला है। मानव सभ्यता के विकास से जुड़ी कलाकृतियां मानव के कलात्मक अभिव्यक्ति के प्रथम सोपान के दर्शन कराते हैं। वर्षों पुरानी सभ्यता की कहानी प्राकृतिक रंगों से जानवरों के शिकार, नृत्य सहित अन्य कलाकृतियों के प्रस्तुत करने वाले शैलचित्रों को कतिपय लोग क्षति पहुंचा रहे हैं। हाल यह है कि शैलचित्रों वाली गुफाएं शराबियों का अड्डा बनी हैं। आग जलाकर मांस और दारू की पार्टी की जाती है। यहां 16 से अधिक स्थान चित्रों के लिए चिन्हित हैं, मगर वहां तक पहुंचने के लिए कोई संकेतक भी नहीं है। 2013 से यहां शैल चित्रों के संरक्षण और पहाड़ी के सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, मगर इनके संरक्षण और संवर्धन में पर्यटन और पुरातत्व विभाग विफल रहा।
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राजकीय संग्रहालय ध्वस्त होने की कगार पर
घोरावल तहसील का शिवद्वार क्षेत्र प्राचीन मूर्तियाें के लिए महत्वपूर्ण है। आस पास के इलाकों में बिखरे पड़े ऐतिहासिक, धार्मिक व पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों व कलाकृतियों के संरक्षण के लिए आमडीह गांव में राजकीय स्थलीय संग्रहालय का निर्माण कर वर्ष 2009 में शुभारंभ किया गया। जो अब उपेक्षा का शिकार होकर है। इसकी दीवार गिर गई है। भवन लगातार जीर्ण शीर्ण होता जा रहा है। दोनों गेट पर ताला बंद रहता है।
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उपेक्षा के अंधेरे में छिप गया तिलिस्मी विजयगढ़ दुर्ग

विजयगढ़ दुर्ग चंद्रकांता की अमर प्रेम कहानी का प्रतीक है। इस तिलिस्मी दुर्ग को लेकर आम जनमानस में कई किस्से हैं। दुर्ग के ऊपर बने छोटे-बड़े सात तालाब हैं। इनमें रामसरोवर तालाब और सीता तालाब में कभी पानी नहीं सूखता। यहां कांवरिये जल भरकर जलाभिषेक करने जाते हैं। किले के पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार धराशायी हो रहा है। दक्षिण और पूर्व के कोने पर खिड़की का रास्ता है। जमीन से करीब पांच सौ मीटर ऊंचाई पर बने इस किले के अंदर बने कमरे खंडहर हो गए हैं। अब इस किले की पहचान बाबा मीरान शाह की मजार, हनुमान मंदिर और राम-सीता सरोवर तक ही सिमट कर रह गई है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह स्थल अवशेष मात्र रह गया है।
बेलौड़ी डाक बंगला नशेड़ियाें का अड्डा
रामगढ़। सिलहट और धंधरौल बांध के निर्माण के दौरान 1914 में ब्रिटिश शासन में बना बेलौड़ी डाक बंगला उपेक्षा का शिकार है। इसमें अब एक भी दरवाजे और खिड़कियां नहीं है। कोई अधिकारी या वीआईपी के रुकने की व्यवस्था नहीं है। यह अब सिर्फ नसेड़ियों का अड्डा बन गया है।

फासिल्स पार्क में बढ़ रही गंदगी

सलखन में 150 करोड़ वर्ष पुराने फासिल्स हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा फासिल्स पार्क है। 25 हेक्टेयर में फैला यह पार्क अमेरिका के यलो स्टोन पार्क से भी बड़ा है। यहां के फासिल्स का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि ये जीवन की शुरुआत की कहानी बयां करते हैं। यहां भूवैज्ञानिक एवं जैविक इतिहास के विषय में जानकारी प्राप्त की जाती है। मगर अब यहां हलचल बढ़ने के साथ गंदगी और प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे जीवाश्म के प्रभावित होने का खतरा बना है।
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