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Sonebhadra News: धन खर्च नहीं कर सके सरकारी विभाग, सरेंडर किए 80 करोड़
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शासन से वित्तीय वर्ष 2022-23 में विकास कार्यो के लिए मिली धनराशि सरकारी विभाग खर्च नहीं कर सकें। नतीजन वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन उन्हे शेष बचे धनराशि सरेंडर करने पड़े हैं। विभागों की तरफ से लगभग 80 करोड़ रुपये सरेंडर किया गया है। सर्वाधिक धनराशि पीडब्ल्यूडी-4 ने सरेंडर किया है।नीति आयोग के आकांक्षी जिलों में शामिल सोनभद्र में विकास कार्यो को लेकर शासन सख्त है। यहां हर क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए सरकार का फोकस है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिले में विकास कार्य कराए जाने के लिए शासन स्तर से विभिन्न विभागों को 17 अरब 78 करोड़ 64 लाख 49 हजार 435 रुपये जारी किए गए थे।
इसमें से सरकारी विभागों की तरफ से कुल करीब 16 अरब 98 करोड़ 69 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके। वित्तीय वर्ष में मिली धनराशि को कई विभाग खर्च नहीं कर सके। इस नाते सत्र के आखिरी दिन 31 मार्च को सभी विभागों की तरफ से कुल मिलाकर करीब 79 करोड़ 95 लाख 45 हजार 706 रुपये सरेंडर किया गया है।
इसमें पर्यावरण विभाग पूरे वित्तीय वर्ष में एक रुपये भी खर्च नहीं कर सका है। विभाग को कुल एक लाख 33 हजार रुपये मिले थे। वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन अधिकारियों ने सारा धन सरेंडर कर दिया।
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ये विभाग धन खर्च करने में रहे फिसड्डी
शासन स्तर से विभिन्न मदों में मिली धनराशि को खर्च करने में कई सरकारी विभाग फिसड्डी रहे। इसमें सबसे ज्यादा पीडब्लूडी 4 की तरफ से 25.21 करोड़ रुपये सरेंडर हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 5.67 करोड़ रुपये, न्याय विभाग से 5 करोड़ से अधिक रुपये सरेंडर किए गए हैं। होम्योपैथिक विभाग की तरफ से एक करोड़ रुपये सरेंडर हुआ है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से 2.86 करोड़, जिलापूर्ति विभाग से 19 लाख, पशुपालन विभाग की तरफ से 77 और मत्स्य विभाग की तरफ से 82 लाख रुपये सरेंडर किए गए हैं।
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इन विभागों को मिली धनराशि हुई खर्च
वित्तीय वर्ष 2022-23 में खादी ग्रामोद्योग विभाग को 16.68 लाख रुपये मिले थे, जो खर्च कर लिए गए हैं। दुग्ध विभाग को 14.31 लाख रुपये खर्च हुआ है। कारागार विभाग को 10 करोड़ 64 लाख रुपये मिले थे, खर्च हो गए। ऋण के लिए दो करोड़ रुपये मिले थे, यह भी खर्च हो गए। होमगार्ड विभाग को मिली धनराशि भी खर्च हो गई है। इन विभागों की तरफ से सरेंडर में शून्य धनराशि अंकित की गई है।
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वर्जन:
सरकारी विभागों की तरफ से वित्तीय वर्ष में मिली धनराशि के सापेक्ष कितना धनराशि खर्च हुआ है, ब्योरा उपलब्ध कराया गया है। उसी आधार पर करीब 80 करोड़ रुपये सरेंडर हुआ हैं। -अजय कुमार सिंह, मुख्य कोषाधिकारी-सोनभद्र।
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इसमें से सरकारी विभागों की तरफ से कुल करीब 16 अरब 98 करोड़ 69 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके। वित्तीय वर्ष में मिली धनराशि को कई विभाग खर्च नहीं कर सके। इस नाते सत्र के आखिरी दिन 31 मार्च को सभी विभागों की तरफ से कुल मिलाकर करीब 79 करोड़ 95 लाख 45 हजार 706 रुपये सरेंडर किया गया है।
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इसमें पर्यावरण विभाग पूरे वित्तीय वर्ष में एक रुपये भी खर्च नहीं कर सका है। विभाग को कुल एक लाख 33 हजार रुपये मिले थे। वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन अधिकारियों ने सारा धन सरेंडर कर दिया।
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ये विभाग धन खर्च करने में रहे फिसड्डी
शासन स्तर से विभिन्न मदों में मिली धनराशि को खर्च करने में कई सरकारी विभाग फिसड्डी रहे। इसमें सबसे ज्यादा पीडब्लूडी 4 की तरफ से 25.21 करोड़ रुपये सरेंडर हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 5.67 करोड़ रुपये, न्याय विभाग से 5 करोड़ से अधिक रुपये सरेंडर किए गए हैं। होम्योपैथिक विभाग की तरफ से एक करोड़ रुपये सरेंडर हुआ है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की तरफ से 2.86 करोड़, जिलापूर्ति विभाग से 19 लाख, पशुपालन विभाग की तरफ से 77 और मत्स्य विभाग की तरफ से 82 लाख रुपये सरेंडर किए गए हैं।
इन विभागों को मिली धनराशि हुई खर्च
वित्तीय वर्ष 2022-23 में खादी ग्रामोद्योग विभाग को 16.68 लाख रुपये मिले थे, जो खर्च कर लिए गए हैं। दुग्ध विभाग को 14.31 लाख रुपये खर्च हुआ है। कारागार विभाग को 10 करोड़ 64 लाख रुपये मिले थे, खर्च हो गए। ऋण के लिए दो करोड़ रुपये मिले थे, यह भी खर्च हो गए। होमगार्ड विभाग को मिली धनराशि भी खर्च हो गई है। इन विभागों की तरफ से सरेंडर में शून्य धनराशि अंकित की गई है।
वर्जन:
सरकारी विभागों की तरफ से वित्तीय वर्ष में मिली धनराशि के सापेक्ष कितना धनराशि खर्च हुआ है, ब्योरा उपलब्ध कराया गया है। उसी आधार पर करीब 80 करोड़ रुपये सरेंडर हुआ हैं। -अजय कुमार सिंह, मुख्य कोषाधिकारी-सोनभद्र।