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Sonebhadra News: धंधरौल बांध पर तैरते इंटेकवेल से 1.43 लाख लोगों की बुझेगी प्यास

Mon, 14 Oct 2024 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2024 12:21 AM IST
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Floating intake well on Dhandhraul dam will quench the thirst of 1.43 lakh people
धंधरौल बांध पर बने तैरते इंटेकवेल से क्षेत्र के 23,779 परिवारों के 1.43 लाख लोगों की प्यास बुझेगी। जल जीवन मिशन की सबसे अनोखी योजना बेलाही ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना बनकर तैयार है। इस इंटेक से 205 गांवों में नल से स्वच्छ पेयजल की सप्लाई की जाएगी। इंटेक से लिया जाने वाला रॉ-वाटर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचेगा और यहां से सात पानी टंकियों के माध्यम से पेयजल सप्लाई की जाएगी।
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जल जीवन मिशन (हर घर जल) कार्यक्रम के तहत जनपद सोनभद्र में 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं का निर्माण विभिन्न फर्मों से कराया जा रहा है। योजनाओं में जल आहरण के लिए सोन नदी, रेणु नदी, धंधरौल बांध, नगवां बांध एवं रिहन्द बांध के किनारे पारंपरिक इंटेकवेल का निर्माण किया जाना है। रिहंद, धंघरौल और नगवां बांध का धरातल पथरीला होने के कारण पारंपरिक इंटेकवेल के निर्माण में अत्यधिक समय एवं खर्च लगना था। साथ ही अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने में भी काफी कठिनाई आ रही थी। इसके समाधान के लिए वारी पोन्टून पुणे से फ्लोटिंग इंटेकवेल के लिए प्रस्तुतीकरण लिया गया और इसके लाभ को देखते हुए नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव को जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने इन नई विधि से सोनभद्र में पेयजल की चुनौतियों से निपटने का निर्णय लिया और फ्लोटिंग इंटेक सिस्टम का कार्य प्रारंभ किया गया। बता देंं कि सोनभद्र क्षेत्रफल की दृष्टि से यूपी का दूसरा सबसे बड़ा जिला है। जो चार राज्य मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ एवं बिहार से घिरा हुआ है। सोनभद्र का 50 प्रतिशत भाग पहाड़ी एवं पथरीला होने के कारण भूमिगत जल में अशुद्धियां एवं जलस्तर कम है।
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फ्लोटिंग इंटेक सिस्टम की खूबियां
यह संरचना जल कि सतह पर तैरती रहती है, जिस कारण इसे आसानी से अत्यधिक जल की उपलब्धता वाले स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। जिन स्थानों पर वॉटर बेसिन के अंदर पत्थर या चट्टानें पाई जाती हैं। वहां पारंपरिक इंटेकवेल का निर्माण किया जाना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसे स्थानों के लिए फ्लोटिंग इंटक सिस्टम एक आसान विकल्प है। इस संरचना के निर्माण एवं रख रखाव की लागत पारंपरिक इंंटकवेल से कम है।
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धंधरौल बांध में स्थायी इंटकवेल के बजाय फ्लोटिंग वेल का इस्तेमाल किया गया है। पथरीली इलाकों में कम लागत में जल्द से जल्द इसे तैयार किया जा सकता है। जिले के भौगोलिग परिस्थितियों के हिसाब से यह सबसे अच्छा है। धंधरौल के साथ ही रिहंद बांद में भी झीलो-बीजपुर परियोजना में इसका इस्तेमाल किया गया है। - महेंद्र सिंह, एक्सईएन-जल निगम ग्रामीण।
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