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रंगोत्सव की धूम में इतराया ऊर्जांचल
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Tue, 22 Mar 2016 09:22 PM IST
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जिला अस्पताल में मंगलवार को अबीर-गुलाल लगाते चिकित्सक
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सोनांचल में होली पर्व को लेकर उत्साह है। मंगलवार को बाजारों में मिठाई, कपड़ा, पिचकारी आदि सामान क्रय करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। घरों में महिलाएं तरह-तरह की पकवान बना रही हैं। शाम से ही बच्चों ने पटाखा छुड़ाना शुरू कर दिया। जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक-दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। हालांकि चिकित्सकों का मानना है कि केमिकलयुक्त रंगों से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
राबर्ट्सगंज निवासी बीना सिंह का कहना है कि होली रंगों का पर्व है। इस पर्व पर लोग गिला-शिकवा दूर कर खुशी से मिलते है। कहा कि घर पर आने वाले मेहमानों की खातिरदारी के लिए गुझिया समेत अन्य पकवान बनाए गए हैं। कंचन बोली सहेलियों और रिश्तेदारों के साथ होली का पर्व मनाऊंगी। होली ही एक ऐसा पर्व है जिस दिन रंग खेल कर खुशी का इजहार किया जाता है। शिरोमणि पांडेय ने कहा कि होली के दिन नौकरी करने वाले व्यक्ति भी घर पर आते है और उनसे मुलाकात होती है।
इससे भाईचारे की भावना भी जागृत होती है। चर्म रोग विशेषज्ञ डा. एसके मंजूल कहते है कि रंगों से एलर्जी होती है। शरीर में दाने निकलने की संभावना उत्पन हो जाती है। इसलिए लोगों को प्रयास करना चाहिए कि वे रंगों से बचे। नेत्र विशेषज्ञ डा. केके पांडेय कहते है कि केमिकल युक्त रंग आंखों में चले जाने से रोशनी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए रंगों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। अबीर-गुलाल लगा कर त्योहार मनाया जाना चाहिए।
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राबर्ट्सगंज निवासी बीना सिंह का कहना है कि होली रंगों का पर्व है। इस पर्व पर लोग गिला-शिकवा दूर कर खुशी से मिलते है। कहा कि घर पर आने वाले मेहमानों की खातिरदारी के लिए गुझिया समेत अन्य पकवान बनाए गए हैं। कंचन बोली सहेलियों और रिश्तेदारों के साथ होली का पर्व मनाऊंगी। होली ही एक ऐसा पर्व है जिस दिन रंग खेल कर खुशी का इजहार किया जाता है। शिरोमणि पांडेय ने कहा कि होली के दिन नौकरी करने वाले व्यक्ति भी घर पर आते है और उनसे मुलाकात होती है।
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इससे भाईचारे की भावना भी जागृत होती है। चर्म रोग विशेषज्ञ डा. एसके मंजूल कहते है कि रंगों से एलर्जी होती है। शरीर में दाने निकलने की संभावना उत्पन हो जाती है। इसलिए लोगों को प्रयास करना चाहिए कि वे रंगों से बचे। नेत्र विशेषज्ञ डा. केके पांडेय कहते है कि केमिकल युक्त रंग आंखों में चले जाने से रोशनी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए रंगों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। अबीर-गुलाल लगा कर त्योहार मनाया जाना चाहिए।
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