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पिता का पता नहीं, मां, नाना और अब नानी का भी उठा साया, कोरोना के कारण मासूम भाई-बहन हुए अनाथ

Fri, 21 May 2021 06:13 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 21 May 2021 06:13 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में दो मासूम बच्चों पर कोरोना का कहर टूटा। पिता, मां और नाना की मौत के बाद बस नानी ही उनकी जिंदगी का सहारा थीं लेकिन जानलेवा वायरस ने नानी की भी जान ले ली।  बाल कल्याण समिति की टीम बच्चों को अपने साथ ले गई है। 
 

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father unknown death of mother grand mother and grand father now innocent brother sister become orphaned due to Corona in soenbhadra
हाल ही में बच्चों की नानी की कोरोना से हुई है मौत - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

"जाके पांव न फटी बिवाई उ का जानै पीर पराई" यानी जिसके पैर में बिवाई नहीं फटती वो दूसरे की पीड़ा क्या जाने। कुछ इसी तरह का भाव शुक्रवार को उन दो नौनिहालों के मन में था जो दुखों को सहते-सहते अपना बचपन गुजार रहे थे। अनाथ हो चुके भाई-बहन को लेने के लिए जब सोनभद्र जिले के म्योरपुर ब्लाक के धरसड़ी गांव में बाल कल्याण समिति की टीम पहुंची तो दोनों बच्चे अपनी पीड़ा बताते हुए फफक पड़े।

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यह देख टीम के सदस्यों की आखें भी नम हो गईं। भला हो भी क्यों न, इन बच्चों ने जिस तरह से अब तक की जिंदगी गुजारी है वह काफी दुःखदायी है। इस कोरोना ने तो बची उम्मीद भी छीन ली। पूरी घटना और बच्चों की जिंदगी को जानने के लिए पहले चलते हैं करीब सात साल पहले। वर्ष 2013 या 14 में एक नाबालिग लड़की को प्रसव हुआ।
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तब इस दुनिया में एक बेटी आई थी। उसके पिता का पता नहीं था। मासूम अपनी मां के साथ नाना-नानी की गोद में खेलती बड़ी हो रही थी। तभी तीन साल बाद उसी मां की कोख से मासूम को एक भाई मिल गया।

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दोनों नाना-नानी के संरक्षण में पल रहे थे। तभी ईश्वर ने मां को छीन लिया। फिर दोनों बच्चों को नाना-नानी संभाल रहे थे। लेकिन कुछ माह बाद नाना की भी असमय मौत हो गई। अब बची नानी। नानी दो बच्चों को पालने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं तो पुत्र को 10 हजार रुपये में गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दिया। बालिका को वह पाल रही थीं, तभी इस वर्ष कोरोना ने नानी का भी साया उठा लिया।

सात साल की बेटी की बात सुनकर सभी हुए सन्न

जब धरसड़ी गांव में दोनों अनाथ बच्चों को लेने के लिए बाल कल्याण समिति के लोग पहुंचे तो सात वर्षीय बालिका और चार वर्षीय बालक को बुलाया गया। बालक कुछ नहीं बता पाया, लेकिन बालिका ने अपनी नानी से सुनी हर बात बता डाली।

कहने लगी नानी की मौत के बाद वह गांव के ही एक व्यक्ति के यहां खाना खाती है। कभी-कभी गांव के अन्य लोग भी खिला देते हैं। भाई को जानती तो है, लेकिन वह दूसरे के यहां रहता है, उसकी परवरिश होती है इस लिए उसे परेशान नहीं करने जाती।

जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र पौत्स्यायन ने कहा कि दोनों अनाथ बच्चों को अब प्रशासन संरक्षण देगा। टीम वहां से दोनों बच्चों को लेकर आ रही है। यहां नियमानुसार उन्हें बालगृह बालक और बालिका में रखा जाएगा। दोनों को बेहतर परवरिश दी जाएगी।

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