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नए कृषि कानूनों से गुलाम बन जाएंगे किसान : राजेंद्र सिंह

Sun, 28 Feb 2021 12:28 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 12:28 AM IST
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Farmers will become slaves due to new agricultural laws: Rajendra Singh
म्योरपुर (सोनभद्र)। हाल में बने तीन कृषि कानून किसानों को गरीब नहीं बल्कि गुलाम बनाएंगे। इसमें जो प्रावधान हैं उस हिसाब से किसानों का भला होने वाला नहीं है। इसे किसानों पर जबरन थोपा जा रहा है। इसे हर हाल में रद्द होना चाहिए। जनता इस कानून को नहीं चाहती। यह आंदोलन अब गांवों से भी शुरू होगा। ये बातें शुक्रवार को बनवासी सेवा आश्रम गोविंदपुर में दो दिवसीय महिला शिविर में मैग्सायसाय पुरस्कार से सम्मानित जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहीं। उन्होंने नदियों से बालू खनन और दोहन को लेकर भी चिंता जतायी। कहा कि इससे नदियां बीमार हो जाती हैं।
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आश्रम परिवार व महिला शिविर में खेती-किसानी पर चर्चा करते जल पुरुष ने कृषि कानूनों के बारे में विस्तार से बताया। उसकी खामियों को भी गिनाया। कहा कि इस कानून में एक इंस्पेक्टर नियुक्त होने का प्रावधान हैं। अगर मान लिया जाए कि एक इंस्पेक्टर नियुक्त होगा और वही खेती की निगरानी करेगा तो इससे किसानों का भला नहीं होने वाला। इसी तरह कुछ अन्य अधिकारियों को भी विशेष अधिकार देने की बात है। कुल मिलाकर इससे किसानों को फायदा नहीं नुकसान है। नदियों की वर्तमान स्थिति पर उन्होंने कहा कि नदियों से बालू के खनन और दोहन से नदी का फेफड़ा सूख जाता है और नदी बीमार हो जाती है। जिसका असर हमारे शरीर पर पड़ता है। इस चक्र को समझना जरूरी है। नदी की हत्या कर खनन करने वालों के खिलाफ स्थानीय जनता को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने सोन, कनहर और पांगन नदी में होने वाले खनन को लेकर चिंता जताया। महिलाओं का आह्वान किया कि वे नदियों को बचाने के लिए आगे जाएं। यह आप की नैतिक जिम्मेदारी है कि धरती पर हरियाली लाने का प्रयास करें और प्राकृतिक संसाधनों को लूटने वालों के खिलाफ अहिंसात्मक लड़ाई लड़े। सोनभद्र की मिट्टी हवा,पानी सब प्रदूषित हो गया है। यह पूंजीपतियों का ही देन है। आज हमारा अधिकार छीना जा रहा है। हम विवश किए जा रहे है, लेकिन हमें चुप नहीं बैठना है हमारे पास ताकत है वह है लोक की ताकत, जिससे तंत्र को ठीक किया जा सकता है। कहा कि नदियों, पहाड़ों और जंगलों को बचाने के लिए युवाओं, छात्रों, आमजनों और तंत्र सबको आगे आना चाहिए। जो लोग इसके लिए संघर्ष कर रहे है उंन्हे निराश नही होना चाहिए। आजादी की लड़ाई 1857 से शुरू होकर 1947 तक 90 साल चली। हमे अहिंसात्मक तरीके से संघर्ष करते रहना है। कार्यक्रम मैं बड़ी संख्या में आश्रम कार्यकर्ता और महिलाएं मौजूद रहीं।
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