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Sonebhadra News: फसल बीमा से किसानों का मोहभंग, चार साल में आधे से भी कम हुई संख्या
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सोनभद्र। प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर आर्थिक सुरक्षा देने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों का मोहभंग होता दिख रहा है। बीमा का लाभ मिलने में देरी और क्लेम के भुगतान को लेकर किसानों की बेरुखी का असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023-24 में खरीफ और रबी सीजन में कुल 47087 किसानों ने फसल बीमा कराया था, लेकिन अगले ही वर्ष यह संख्या घटकर 25745 रह गई। यानी एक साल में ही 21342 किसान योजना से दूर हो गए। चालू खरीफ सीजन में भी 31 अगस्त की अंतिम तिथि से पहले अब तक 15812 किसान ही बीमा करा सके हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आंकड़े बता रहे हैं कि 10 ब्लॉक वाले सोनभद्र जिले में इस योजना में किसानों का पहले जैसा रुचि नहीं रह गया है। इसके पीछे का कारण समय से फसल का क्लेम नहीं कर पाना और जागरूकता का अभाव माना जा रहा है। फसल क्षति होने की स्थिति में बीमित किसान को 72 घंटे में टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल करना होता है। मगर आपदा के दौरान अधिकांश किसान व्यक्तिगत रूप से फसल क्षति होने के बाद भी क्लेम नहीं कर पाते हैं। फसल क्षति होने के बाद कितने किसान टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं और कितने किसानों का मौके पर जाकर सर्वे किया, समय से इसका पता नहीं चल पाता है। कृषि विभाग की तरफ से जारी फसल बीमा योजना के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021-22 में खरीफ व रबी सीजन में 33407 किसानों ने बीमा कराया था। वर्ष 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 56959 हुई, लेकिन इसके बाद लगातार गिरावट दर्ज हुई। वर्ष 2023-24 में 47087 और वर्ष 2024-25 में महज 25745 किसानों ने बीमा कराया। हालांकि 2025-26 में खरीफ और रबी को मिलाकर बीमित किसानों की संख्या बढ़कर 34977 हुई, लेकिन यह संख्या भी वर्ष 2022-23 के मुकाबले करीब 22 हजार कम है। बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में गिरावट के बीच योजना से लाभ पाने वाले किसानों की तस्वीर भी उतार-चढ़ाव वाली रही। वर्ष 2023-24 में 11764 किसानों को 867.66 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मिली थी। वर्ष 2024-25 में 7829 किसानों को 733.87 लाख रुपये मिले। वहीं 2025-26 के खरीफ में 6425 किसानों को 1194.56 लाख रुपये का भुगतान किया गया। रबी सीजन में क्लेम करने वाले किसानों के खातों में बीमित राशि भेजने की कार्रवाई अभी चल रही है।पहले फसल बीमा अनिवार्य होने के कारण बड़ी संख्या में किसान योजना से जुड़ते थे। अब यह स्वैच्छिक है। ऐसे में जिन किसानों को समय पर या अपेक्षा के अनुरूप बीमा राशि नहीं मिलती, वे अगली बार बीमा कराने से पीछे हट जाते हैं। रामभरोस, सोमदत्त त्रिपाठी, रामललित और सुशील समेत अन्य किसानों का कहना है कि फसल नुकसान के बाद क्लेम प्रक्रिया पूरी होने और भुगतान मिलने में समय लगने से योजना पर भरोसा कम हुआ है। वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन में 19080 किसानों ने बीमा कराया था। इसके मुकाबले 29 अगस्त तक चालू खरीफ सीजन में 15812 किसान ही बीमा करा पाए हैं। पिछले साल के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दो दिन में अभी 3268 और किसानों को बीमा कराना होगा। बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। शासन स्तर से इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा का पोर्टल देर से चालू किया गया। बीमा के लिए चार अगस्त को आदेश जारी हुआ। 14 अगस्त तक ही नॉन लोनिंग वाले किसानों को फसल बीमा कराना था। शुरू के तीन-चार दिन पोर्टल अच्छे से नहीं चलने और नॉन लोनिंग वाले किसानों को कम समय मिलने की वजह से भी चालू वर्ष में कम किसान फसल बीमा करा पाए हैं। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के मारकुंडी गांव के किसान कृपाशंकर देव पांडेय का कहना है कि रबी सीजन 2024 में बीमा कराए थे। फसल को क्षति होने पर क्लेम के लिए सारी प्रक्रिया अपनाई, मगर आज तक क्लेम के नाम पर फुड़ी कौड़ी तक नहीं मिली। मारकुंडी गांव की महिला किसान सुमन के अनुसार इन्होंने खरीफ 2023 में फसल बीमा कराई थी। नियमानुसार क्लेम करने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के केवटा गांव के किसान दिनेश कुमार पाठक और नगवां ब्लॉक के बनबहुआर गांव के विवेकानंद ने रबी सीजन 2025 में फसल बीमा कराया था। प्राकृतिक आपदा के चलते फसल नुकसान होने बीमा के लाभ के लिए क्लेम किया, मगर कोई राहत नहीं मिली। किसानों के मुताबिक क्लेम करने वाले किसानों का 10 दिन के अंदर सर्वे करना होता है।
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