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प्रसव के बाद महिला की मौत पर परिजनों का हंगामा
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मधुपुर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर में शुक्रवार को प्रसव के बाद लोहरा गांव निवासी एक महिला की मौत होने के मामले में शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा फुट गया। स्वास्थ्य केंद्र पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। उधर, सीएमओ के निर्देश पर मौके पर पहुंचे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.बीके अग्रवाल ने समझा बुझाकर शांत कराया। आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
लोहरा गांव के गोविंद ने बताया कि वह अपनी पत्नी पुष्पा(22) को प्रसव के लिए 25 फरवरी की सुबह मधुपुर सीएचसी लेकर पहुंचें। जहां मौजूद महिला स्वास्थ्य कर्मी ने कुछ घंटे बाद प्रसव होने की बात कहकर उसे अपने यहां भर्ती कर लिया। दोपहर में इंजेक्शन देने के कुछ देर बाद पुष्पा ने स्वस्थ बालक को जन्म दिया। कुछ देर बाद महिला को खून आने लगा। इसपर उसका खून जांच कराया गया, जांच मेें खून की मात्रा कम पाए जाने के बाद भी उसे कुछ ही घंटे बाद घर जाने के लिए कह कर छोड़ दिया गया। बताया गया कि आगे कोई परेशानी नहीं होगी। 26 फरवरी को सुबह पुष्पा की तबीयत काफी खराब हो गई और वह अचेत होने लगी। स्थिति खराब होने पर एंबुलेंस से पुष्पा को पीएचसी ले जाया गया। जहां स्थिति गंभीर देख जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने पुष्पा को मृत घोषित कर दिया और बिना किसी जांच के ही शव को परिजनों को दे दिया गया।
परिजन शव को घर ले जाकर दाह संस्कार कर दिए। उधर, महिला की मौत से नाराज विहिप मातृशक्ति की जिलाध्यक्ष सुमन सिंह पटेल कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंच कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सुकृत पुलिस लोगों को नियंत्रित करने में लगी रही। इस संबंध में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) का कहना है कि प्रथम दृष्टया महिला की मौत मामले में स्वास्थ्य कर्मचारी व सीएचसी प्रभारी की लापरवाही सामने आ रही है। किसी भी दशा में महिला को 24 घंटे के अंदर घर नहीं भेजा जाना चाहिए था और गंभीर अवस्था में उसे जिला अस्पताल भेजने के बजाय घर भेज दिया गया। जिला अस्पताल दूसरे दिन जाने के बाद किन परिस्थितियों में शव को बिना पोस्टमार्टम के परिजनों को दे दिया गया। इसकी भी जांच की जाएगी।
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लोहरा गांव के गोविंद ने बताया कि वह अपनी पत्नी पुष्पा(22) को प्रसव के लिए 25 फरवरी की सुबह मधुपुर सीएचसी लेकर पहुंचें। जहां मौजूद महिला स्वास्थ्य कर्मी ने कुछ घंटे बाद प्रसव होने की बात कहकर उसे अपने यहां भर्ती कर लिया। दोपहर में इंजेक्शन देने के कुछ देर बाद पुष्पा ने स्वस्थ बालक को जन्म दिया। कुछ देर बाद महिला को खून आने लगा। इसपर उसका खून जांच कराया गया, जांच मेें खून की मात्रा कम पाए जाने के बाद भी उसे कुछ ही घंटे बाद घर जाने के लिए कह कर छोड़ दिया गया। बताया गया कि आगे कोई परेशानी नहीं होगी। 26 फरवरी को सुबह पुष्पा की तबीयत काफी खराब हो गई और वह अचेत होने लगी। स्थिति खराब होने पर एंबुलेंस से पुष्पा को पीएचसी ले जाया गया। जहां स्थिति गंभीर देख जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने पुष्पा को मृत घोषित कर दिया और बिना किसी जांच के ही शव को परिजनों को दे दिया गया।
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परिजन शव को घर ले जाकर दाह संस्कार कर दिए। उधर, महिला की मौत से नाराज विहिप मातृशक्ति की जिलाध्यक्ष सुमन सिंह पटेल कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंच कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सुकृत पुलिस लोगों को नियंत्रित करने में लगी रही। इस संबंध में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) का कहना है कि प्रथम दृष्टया महिला की मौत मामले में स्वास्थ्य कर्मचारी व सीएचसी प्रभारी की लापरवाही सामने आ रही है। किसी भी दशा में महिला को 24 घंटे के अंदर घर नहीं भेजा जाना चाहिए था और गंभीर अवस्था में उसे जिला अस्पताल भेजने के बजाय घर भेज दिया गया। जिला अस्पताल दूसरे दिन जाने के बाद किन परिस्थितियों में शव को बिना पोस्टमार्टम के परिजनों को दे दिया गया। इसकी भी जांच की जाएगी।
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