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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Family members searched for their loved ones in rags, identifying them through clothes, sacred thread and body parts.

Sonebhadra News: चिथड़ों में अपनों को ढूंढते रहे परिजन, कपड़े, कलावा और अंगों से हुई पहचान

Tue, 18 Nov 2025 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:03 AM IST
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Family members searched for their loved ones in rags, identifying them through clothes, sacred thread and body parts.
जिला संयुक्त चिकित्सालय में अपने परिजनों की तलाश करने पहुंचे जुगैल निवासी रामखेलावन के परिवारीज
सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी स्थित श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में हुआ हादसा इतना भयावह था कि शव देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। मजदूरों के शरीर के चिथड़े उड़ गए थे। शव इतना क्षत-विक्षत था कि उसकी पहचान करना भी मुश्किल रहा। काफी देर तक परिजन चिथड़ों में अपनों को तलाशते रहे। किसी की पहचान हाथ में बंधे कलावा और गोदना से हुई तो किसी को उसके कपड़ों से पहचाना गया। अलग-थलग पड़े शरीर के अंगों को सहेजकर किसी तरह पोस्टमॉर्टम कराया गया। फिर उसे कपड़े में लपेटकर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपा गया।
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पत्थर तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग से पहले डि्रलिंग कर अंदर विस्फोटक भरा जाता है। शनिवार को दोपहर श्री कृष्णा माइनिंग की खदान में यही प्रक्रिया चल रही थी। नौ ट्रैक्टर व कंप्रेशर मशीन के साथ 18 मजदूर नीचे काम कर रहे थे। अचानक करीब डेढ़ सौ फीट ऊंचाई से भारी चट्टान गिरा, जिसके मलबे में मजदूर दब गए। यह वही चट्टान है, जिसे हटाने में 30 घंटे से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगी रहीं। कई पोकलैन, हाइड्रा सहित अन्य भारी मशीनों की मदद से सोमवार की रात करीब आठ बजे चट्टान को हटाने में सफलता मिली, जिसके बाद शवों को बाहर निकाला जा सका। शवों की दशा देख हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। शरीर क्षत-विक्षत और चेहरा गायब था। कपड़े खून और धूल में सन गए थे। बाद में शरीर के अंगों पर बने निशान और कपड़ों के टुकड़ों को देखकर पहचाना गया। इंद्रजीत की पहचान उसकी कलाई पर बने गोदना निशान से हुई, जबकि संतोष को कलावा और कपड़े से भाई छोटू यादव ने पहचाना। घटना का छोटू प्रत्यक्षदर्शी था, लिहाजा उसे सबके कपड़े और हुलिया का अंदाजा भी था। कचनरवा के रवींद्र गोंड ने हाथों में कड़ा पहन रखा था। साथ में नेवी ब्लू रंग का जिंस था। इन्हीं दो चीजों से पिता राजकुमार ने उसे पहचाना। कृपाशंकर के परिवार के लोग हर शव को निहार रहे थे, लेकिन किसी से पहचान नहीं हो पाई।
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बच्ची के कपड़ा खरीद लिहा, हम इतवार के दवाई लेके आइब...
- घटना से एक दिन पहले कृपाशंकर ने पत्नी से फोन पर बातचीत में किया था वादा
सोनभद्र। पोस्टमार्टम हाउस के सामने चबूतरे की ओट में बैठी सुरसती देवी की आंखों के आंसू सूख चुके थे। गोद में तीन माह की बेटी को लेकर वह निढाल पड़ी थी। कानों में बार-बार वही शब्द गूंज रहे थे, जो पति ने घटना से एक दिन पहले फोन पर हुई बातचीत में उससे कहा था। करीब 15 दिनों पहले खदान में मजदूरी के लिए घर से निकले कृपाशंकर ने कहा था कि वह इस रविवार को घर जरूर आएगा।
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शुक्रवार को फोन पर बातचीत में सुरसती ने उसे मासूम बच्ची की तबीयत के बारे में जानकारी दी थी। कहा था कि उसे दवा दिलानी होगी। तब पति ने भरोसा दिया था कि शनिवार को काम खत्म होने पर हिसाब होगा। पैसे लेकर वह सीधे घर आएगा। पत्नी से कहा था कि बेटी के लिए नए कपड़े खरीद लेना। वह दवा लेकर आएगा। पति के साथ इस अंतिम बातचीत का जिक्र करते हुए सुरसती देवी बिलखती रही। पास में उसके साथ उनकी छह साल की बेटी सरिता भी थी। दोनों बच्चियों को निहारते हुए वह लोगों से पूछती रही कि अब उनकी परवरिश कैसे होगी। सुरसती देवी के मुताबिक कृपाशंकर घर पर रहकर ही खेती करता था। इस वक्त खेती का काम नहीं था, इसलिए वह खदान में काम करने चला गया था। सोचा था कि कुछ पैसे मिल जाएंगे। इसके बाद वह घर आकर धान की कटाई करेगा, मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था।
संतोष और इंद्रजीत को खदान तक खींच लाई थी मौत
सोनभद्र। पनारी ग्राम पंचायत के करमसार टोला निवासी सगे भाई इंद्रजीत और संतोष की खनन हादसे में जान चली गई। दोनों भाई ने इससे पहले कभी खदान में काम नहीं किया था। एक सप्ताह से ही वह खदान में मजदूरी करने गए थे। इसी दौरान वह काल के गाल में समा गए।
शोभनाथ यादव के चार पुत्रों में सबसे बड़ा राजेश ओबरा के ही एक मिल में काम करता था। इंद्रजीत भी ओबरा में दैनिक मजदूरी करता था। अमूमन हर रोज उसे दिहाड़ी मिल जाती थी। इसी से परिवार का खर्च भी चलता था। तीसरे नंबर पर संतोष दूध बेचता था। सबसे छोटा छाेटू यादव ही खदान में काफी पहले से काम करता आ रहा था। छोटू ने ही दोनों भाइयों को खदान में साथ काम करने के लिए तैयार किया था। बताया था कि इससे उन्हें अच्छी मजदूरी मिल जाएगी। करीब पांच दिन से वह अलग-अलग जगहों पर काम कर रहे थे। संतोष कंप्रेशर चलाता था, जबकि इंद्रजीत हेल्पर था। शनिवार को काम खत्म करने के बाद वह सीधे घर जाने वाले थे। इसके लिए सर्फ, साबुन सहित अन्य सामान भी खरीद रखा था, ताकि काम के बाद नहा-धोकर निकल सकें। किसी को पता नहीं था कि खदान से वह कभी जिंदा बाहर ही नहीं जा पाएंगे। इंद्रजीत की पत्नी पार्वती और संतोष की पत्नी गायत्री का रो-रोकर हाल बेहाल था।
धमाके की आवाज सुन नींद खुली तो छा गया था अंधेरा
सोनभद्र। खदान हादसे के वक्त करमसार निवासी छोटू यादव मौके पर था। उसने अपनी आंखों के सामने घटना का खाैफनाक मंजर देखा था। तीन दिन बाद भी वह इसे भूल नहीं पाया है। बार-बार उसकी आंखों के सामने वही दृश्य घूम रहा है। छोटू ने बताया कि खदान में ब्लास्टिंग से पहले डि्रलिंग के लिए नौ ट्रैक्टर व कंप्रेशर लगाए गए थे। प्रत्येक पर दाे-दो मजदूर काम कर रहे थे। अपना ट्रैक्टर लेकर मैं किनारे आ गया था। सीट पर ही लेटकर आराम कर रहा था। अचानक तेज धमाका हुआ और गहरे धुंध के कारण आंखों के सामने जैसे अंधेरा छा गया। करीब दस मिनट तक यही स्थिति रही। इसके बाद देखा तो भारी चट्टान पहाड़ी से नीचे गिर गया था। मेरे दोनों सगे भाई इंद्रजीत और संतोष के साथ अन्य मजदूर इसके नीचे दब गए थे। एक मजदूर पूरी तरह सुरक्षित था, जबकि दो घायल हुए थे। खदान से जुड़े लोग वाहन से आए और दोनों घायलों को तत्काल वहां से वाहन में लेकर चले गए। अन्य मजदूरों का कहीं पता नहीं था। छोटू ने दावा किया कि 15 मजदूर मलबे में दबे थे, जिसमें से छह के बारे में ही पता चल पाया है। अन्य मजदूर अभी भी मलबे में ही दबे हुए हैं।

राम खेलावन को ढूंढते पहुंची पत्नी, घटना के बाद से लापता
सोनभद्र। खदान के अंदर मलबे में छह मजदूरों के दबने की पुष्टि अब तक प्रशासन की ओर से की गई है। इसमें एक नाम राम खेलावन का भी है। प्रशासन की ओर से जारी सूची में पनारी ग्राम पंचायत के खड़री टोला निवासी रामखेलावन (40) पुत्र सीताराम का उल्लेख है। सोमवार को दोपहर जुगैल के ढोसरी डांड टोला निवासी मानमति पोस्टमार्टम हाउस पहुंची। वह अपने पति रामखेलावन को ढूंढ रही थी। बताया कि पति 15 दिन पहले खदान में काम करने के लिए निकला था। दो दिन पहले क्षेत्र के एक व्यक्ति से मुलाकात होने पर बताया था कि शनिवार को मजदूरी का हिसाब करने के बाद रविवार को घर पहुंचेगा। पति के न पहुंचने पर चिंतित मानमति अपनी सास मितका देवी के साथ पहले खदान पहुंचीं। वहां से उन्हें पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया। यहां वह शव को देखकर पहचान की कोशिश में लगे रहे, लेकिन पति का पता नहीं चल सका।
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