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Sonebhadra News: प्रदूषण प्रभावित म्योरपुर ब्लॉक में फ्लोरोसिस से जूझ रहा हर 13वां व्यक्ति

Mon, 03 Nov 2025 10:58 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 03 Nov 2025 10:58 PM IST
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Every 13th person in the pollution-hit Myorpur block is suffering from fluorosis.
सोनभद्र। प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र म्योरपुर ब्लॉक में हर 13वां व्यक्ति फ्लोरोसिस से जूझ रहा है। पहले रिहंद बांध के उत्तरी छोर पर फ्लोराइड का असर कम था लेकिन अब यहां भूगर्भ जल में फ्लोराइड तेजी से बढ़ रहा है। बीते दिनों क्षेत्र के 16 गांवों में लगाए गए कैंप में 112 मरीज फ्लोरोसिस से पीड़ित मिले। स्वास्थ्य निदेशक को इसकी रिपोर्ट भेजने के साथ ही प्रभावित क्षेत्र में नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य कैंप लगाने और प्रभावितों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी की याचिका पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की तरफ से म्योरपुर ब्लॉक के अत्यधिक प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर बीमारी की स्थिति जांचने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में 18 अगस्त से 14 अक्तूबर के बीच प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र के 16 गांवों में अलग-अलग तिथियों में कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच की गई। बीजपुर पुनर्वास, खजुरा, बेलहत्थी, जमशीला, खंता, खाड़पाथर-मुर्धवा, कोडरा, रजनीटोला, डोड़हर, पाटी-कुवारी, सेंदूर मकरा, कुबरी, अनपरा, धरसड़ी, शक्तिनगर और योगेंद्रा में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। इस दौरान कुल 1444 ग्रामीणों की जांच की गई। इसमें 112 मरीज फ्लोराइड जनित फ्लोरोसिस बीमारी से ग्रसित पाए गए। तीन की स्थिति गंभीर पाए जाने पर विशेषज्ञ चिकित्सक के पास रेफर किया गया। जिन मरीजों में सामान्य यानी शुरुआती लक्षण थे उन्हें स्वास्थ्य शिविर में ही दवा और जरूरी सलाह उपलब्ध कराई गई।
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खाड़पाथर-मुर्धवा की स्थिति को देखते हुए 15 मरीजों के यूरिन सैंपल भी जांच के लिए लिए गए। शक्तिनगर और धरसड़ी में फ्लोराइड से कोई भी मरीज प्रभावित नहीं पाया गया। जमशीला में सबसे ज्यादा 24 मरीज मिले। बीजपुर में 12, खजुरा में नौ, बेलहत्थी में 18 मरीज पाए गए। अनपरा में भी चार मरीजों में फ्लोरोसिस के लक्षण मिले।
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बता दें कि फ्लोराइड की अधिकता से दंत और कंकालीय फ़्लोरोसिस की बीमारी होती है। दंत फ्लोरोसिस को सामान्य माना जाता है लेकिन कंकालीय फ्लोरोसिस को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है। इसमें हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती है कि जवां उम्र में ही बुजुर्ग जैसी स्थिति दिखने लगती है।



सांस के मरीजों की भी चिंताजनक स्थिति



जांच के दौरान सांस के मरीजों की स्थिति गंभीर पाई गई। कुल 179 ग्रामीण सांस की बीमारी से ग्रसित पाए गए। इसमें 46 की स्थिति गंभीर मिली, जिन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास भेजा गया। सबसे ज्यादा जमशीला और धरसड़ी में 30-30 मरीज पाए गए। अनपरा में यूपीएस कुबरी पर लगे कैंप में 10 और संयुक्त चिकित्सालय में 13 मरीज चिह्नित किए गए। योगेंद्रा में 24, शक्तिनगर में 15, डोड़हर में 18, बीजपुर में 12 पीड़ित मिले।


प्रदूषण प्रभावित एरिया में फ्लोराइड और सांस के मरीज पाए गए हैं। जिनकी स्थिति गंभीर थी उन्हें विशेष चिकित्सकों के पास रेफर किया गया। स्थिति को देखते हुए प्रभावित एरिया में एक निश्चित अंतराल पर नियमित स्वास्थ्य कैंप लगाने और मरीजों को चिह्नित कर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए है। डॉ. पीके राय, सीएमओ सोनभद्र।
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