UP: 'आज भी सुनाई देती है बेटी की चीख...', प्रिया की मौत से नहीं रुक रहे मां-बाप के आंसू; दो बेटियां नहीं रहीं
सोनभद्र के दुद्धी कस्बे में बीते शुक्रवार को गर्म छोले में गिरने से डेढ़ वर्षीय मासूम झुलस गई थी। उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। मूल रूप से झांसी के रहने वाले शैलेंद्र का परिवार पिछले चार साल से दुद्धी में किराए के मकान में रह रहा है। घटना के तीसरे दिन भी घर में चूल्हा नहीं जला।
विस्तार
सोनभद्र के दुद्धी कस्बा स्थित जीआइसी खेल मैदान के समीप निजी मकान में किराएदार झांसी निवासी युवक शैलेंद्र की डेढ़ वर्षीय बिटिया प्रिया की गर्म छोले में गिरकर से मौत हो गई थी। घटना के तीसरे दिन भी यहां चूल्हे नहीं जले। परिवार ही नहीं आसपास के लोग भी गम में डूबे हुए हैं।
बताया जाता है कि घर में बीते 27 जून को करीब साढ़े आठ बजे सुबह प्रतिदिन की तरह फुल्की का मटेरियल बनाने में शैलेंद्र जुटे हुए थे। घर के बाहर आंगन में बड़े भगौने में लकड़ी के चूल्हे पर छोला बनकर तैयार था। बिटिया प्रिया खेलते-खेलते छोले के भगौने में जाकर गिर गिर गई।
पहली बेटी भी इसी तरह मरी थी
बेटी के रोने के आवाज सुनकर बाहर काम कर रही मां पूजा दौड़ती हुई अंदर आई और बिना सोचे अपने लाडली का बाहर लेकर भागी। प्रिया बुरी तरह से झुलस चुकी थी। परिजनों ने घायलवस्था में सीएचसी दुद्धी में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने 80 फीसदी जलने की पुष्टि कर जिला अस्पताल के लिए रिफर कर दिया।
मासूम प्रिया को जिला हॉस्पिटल में पहुंच कर उपचार कराते ही मौत हो गई। डेढ़ वर्षीय प्रिया के मौत के बाद उसकी मां पूजा का तीसरे दिन भी बुरा हाल है। भावुक होकर वह बताती हैं कि तीन साल पहले दाल के पानी मे गिरने के बाद बड़ी बिटिया सौम्या की मौत हुई थी। जिसके बाद बड़ी मुश्किल से दो वर्ष की सौम्या को भूल पाई थी।
दूसरी डेढ़ वर्षीय बिटिया प्रिया के साथ मेरा मन लग गया था। छोटी बिटिया के साथ पूरे दिन बोलते-बतियाते हमारा समय बीतता था। प्रिया तरह-तरह की बात करती थी। तरह-तरह के इशारा करके मुझे बुलाया करती, खूब चिल्लाकर बुलाती। खिलौनों के साथ बिटिया खेलते हुए मुझे बहुत याद आ रही है।
दंपती अब चले जाएंगे अपने घर
मुझे रात में ऐसा लगता है कि मुझे कोई मेरी बेटी को लाकर के दे दे। मुझे रात को नींद नहीं आ रही है। बिटिया की याद में नींद-भूख सब कुछ खत्म हो चुका है। उसकी आवाज आज भी हमारे कानों में गूंज रही है। अब मुझे यहां नहीं रहना, इस घटना के पहले भी प्रिया दो बार आग से झुलस चुकी थी।
तीसरी बार 80 फीसदी जल जाने के बाद करीब ढाई घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई थी। बड़ी बिटिया सौम्या की मौत झांसी के ससुराल में ही गर्म दाल के पानी में गिर गई थी।
भावुक पिता शैलेंद्र ने बताया कि दुद्धी में बीते पांच-छह साल से रहकर फुल्की की दुकान ठेले पर लगाकर जीवकोपार्जन कर रहा हूं। मेरी दो बेटियां ही रहीं, लेकिन नसीब में नही होने की वजह से दोनों बिटिया की मौत हो गई। बड़ी बिटिया की मौत अपने मूल निवास झांसी जिले में तीन वर्ष पहले हुई थी। उसके बाद हम अपनी पत्नी को लेकर दुद्धी रहने लगे।
बताया कि बड़ी बिटिया के शोक में मुझे झांसी जाने को कभी इच्छा ही नहीं हुई। लेकिन मेरे नसीब में छोटी बिटिया भी नही थीं। दुद्धी में रहकर भी उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद तो मेरा बिल्कुल भी जीने को मन नही कर रहा। अब दुद्धी भी नही रहेंगे। आज ही हम दोनों अपने घर झांसी चले जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें- खौलते छोले में गिरने से डेढ़ वर्षीय बच्ची की मौत, दो साल पहले दाल में गिरकर बड़ी बहन ने जान गंवा दी थी