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Sonebhadra News: जहां बनती है वहीं के 834 टोलों-मजरों में नहीं पहुंची बिजली, सोलर प्लांट भी खराब
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चोपन ब्लॉक के चोरपनिया गांव में खराब पड़ा सोलर प्लेट। संवाद
सोनभद्र/हाथीनाला/बभनी। चिराग तले अंधेरा की कहावत सोनभद्र के 834 टोलों और मजरों पर सटीक बैठती है। दरअसल, देश में ऊर्जांचल के रूप में पहचान रखने वाले सोनभद्र के इन टोला-मजरों में बिजली नहीं पहुंच सकी है।
इतना ही नहीं जिन टोले-मजरे में एक दशक पहले सोलर प्लांट लगे थे, वे भी खराब हो गए हैं। इससे यहां रहने वाली 20 हजार की आबादी अब भी बिजली आने की आस लगाए बैठी है।
सोनभद्र जिले में कुल 621 ग्राम पंचायतें हैं और राजस्व गांवों की संख्या 1428 है। दो विद्युत वितरण खंड रॉबर्ट्सगंज एवं पिपरी की तरफ से इन गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। मगर अभी जिले के करीब 834 टोले-मजरे में विद्युतीकरण नहीं हो सका है। इसमें पिपरी विद्युत वितरण क्षेत्र के 600 टोले-मजरे हैं।
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जबकि रॉबर्ट्सगंज विद्युत वितरण क्षेत्र में ऐसे सिर्फ 234 मजरे है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है।
इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को रात में मोमबत्ती या फिर सोलर लालटेन के सहारे जीवन बिताना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
करीब एक दशक पहले चोपन, म्योरपुर, बभनी और दुद्धी ब्लॉक के 14 टोला-मजरों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 245 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाए गए थे, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके।
शुरुआत में इनसे कुछ समय तक बिजली आपूर्ति हुई, लेकिन रखरखाव के अभाव और तकनीकी खराबी के चलते अब अधिकांश प्लांट पूरी तरह बंद हो चुके हैं। परिणामस्वरूप जिन गांवों को सौर ऊर्जा से रोशन करने का सपना दिखाया गया था, वहां फिर अंधेरा लौट आया है।
हाल ही में जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जिले में कुल 834 अविद्युतीकृत मजरे चिह्नित किए गए हैं। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बिजली निगम के अधिकारियों को जल्द ही विद्युतीकरण करने के लिए कहा है। आरडीएसएस योजना के तहत कुछ मजरों में कार्य जारी है, लेकिन अधिकांश गांव अब भी इंतजार में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि चोरपनिया, पथगड़ी समेत अन्य टोला में विद्युतीकरण किए बगैर ही मीटर लगा दिया गया था और बिल भी भेजा जाने लगा। ग्रामीणों के विरोध के बाद निगम की तरफ से मीटर जमा कराया गया।
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इतना ही नहीं जिन टोले-मजरे में एक दशक पहले सोलर प्लांट लगे थे, वे भी खराब हो गए हैं। इससे यहां रहने वाली 20 हजार की आबादी अब भी बिजली आने की आस लगाए बैठी है।
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सोनभद्र जिले में कुल 621 ग्राम पंचायतें हैं और राजस्व गांवों की संख्या 1428 है। दो विद्युत वितरण खंड रॉबर्ट्सगंज एवं पिपरी की तरफ से इन गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। मगर अभी जिले के करीब 834 टोले-मजरे में विद्युतीकरण नहीं हो सका है। इसमें पिपरी विद्युत वितरण क्षेत्र के 600 टोले-मजरे हैं।
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जबकि रॉबर्ट्सगंज विद्युत वितरण क्षेत्र में ऐसे सिर्फ 234 मजरे है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है।
इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को रात में मोमबत्ती या फिर सोलर लालटेन के सहारे जीवन बिताना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
करीब एक दशक पहले चोपन, म्योरपुर, बभनी और दुद्धी ब्लॉक के 14 टोला-मजरों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 245 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाए गए थे, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल सके।
शुरुआत में इनसे कुछ समय तक बिजली आपूर्ति हुई, लेकिन रखरखाव के अभाव और तकनीकी खराबी के चलते अब अधिकांश प्लांट पूरी तरह बंद हो चुके हैं। परिणामस्वरूप जिन गांवों को सौर ऊर्जा से रोशन करने का सपना दिखाया गया था, वहां फिर अंधेरा लौट आया है।
हाल ही में जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जिले में कुल 834 अविद्युतीकृत मजरे चिह्नित किए गए हैं। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बिजली निगम के अधिकारियों को जल्द ही विद्युतीकरण करने के लिए कहा है। आरडीएसएस योजना के तहत कुछ मजरों में कार्य जारी है, लेकिन अधिकांश गांव अब भी इंतजार में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि चोरपनिया, पथगड़ी समेत अन्य टोला में विद्युतीकरण किए बगैर ही मीटर लगा दिया गया था और बिल भी भेजा जाने लगा। ग्रामीणों के विरोध के बाद निगम की तरफ से मीटर जमा कराया गया।