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परियोजनाओं ने किया 17 से 19 हजार मेवा का उत्पादन
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सूबे में बढ़ती बिजली की मांग के बीच शुक्रवार को दिन भर परियोजनाओं से 17 से 19 हजार मेगावाट के बीच मांग बनी रही। इस दौरान इकाइयां फुल लोड पर चलीं तो कुछ से क्षमता से अधिक उत्पादन किया गया। रेल रैक शुरू न होने से कई परियोजनाओं के लिए अधिक उत्पादन अब भी एक चुनौती बनी हुई है। मौसम में बदलाव और इकाइयों से उत्पादन ठप होने को भी इसका कारण माना जा रहा है।
शुक्रवार की सुबह से ही बिजली की मांग 19 हजार मेगावाट के पार चल रही थी। दोपहर बाद इसमें थोड़ी कमी हुई तो परियोजनाओं से 17 हजार मेगावाट उत्पादन का आंकड़ा बरकरार रहा। बृहस्पतिवार को 17 हजार के पार चल रही बिजली की न्यूनतम मांग के आंकड़े में शुक्रवार को एक हजार मेगावाट की कमी हुई तो बिजली की न्यूनतम मांग का आंकड़ा 16882 मेगावाट पर बना रहा। वहीं बिजली की अधिकतम मांग में कमी के साथ आंकड़ा 20346 मेवा दर्ज हुआ। रोजाना गहराते कोल संकट के बीच सभी परियोजनाओं से अधिक उत्पादन किया जा रहा है। ऐसे में क्षमता से अधिक उत्पादन करना और रेल रैक का दोबारा शुरू न हो पाना परियोजनाओं के लिए चुनौती बना हुआ है। अनपरा, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा की उत्पादनरत सभी इकाइयां फुल लोउ पर चलीं।
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शुक्रवार की सुबह से ही बिजली की मांग 19 हजार मेगावाट के पार चल रही थी। दोपहर बाद इसमें थोड़ी कमी हुई तो परियोजनाओं से 17 हजार मेगावाट उत्पादन का आंकड़ा बरकरार रहा। बृहस्पतिवार को 17 हजार के पार चल रही बिजली की न्यूनतम मांग के आंकड़े में शुक्रवार को एक हजार मेगावाट की कमी हुई तो बिजली की न्यूनतम मांग का आंकड़ा 16882 मेगावाट पर बना रहा। वहीं बिजली की अधिकतम मांग में कमी के साथ आंकड़ा 20346 मेवा दर्ज हुआ। रोजाना गहराते कोल संकट के बीच सभी परियोजनाओं से अधिक उत्पादन किया जा रहा है। ऐसे में क्षमता से अधिक उत्पादन करना और रेल रैक का दोबारा शुरू न हो पाना परियोजनाओं के लिए चुनौती बना हुआ है। अनपरा, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा की उत्पादनरत सभी इकाइयां फुल लोउ पर चलीं।
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