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विद्युत अभियंता करेंगे राष्ट्र व्यापी हड़ताल
Thu, 27 Dec 2018 11:41 PM IST
मनदीप श्रीवास्तव
sonbhadra news
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Published by: मनदीप श्रीवास्तव
Updated Thu, 27 Dec 2018 11:41 PM IST
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ओबरा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की आम सभा बृहस्पतिवार को तापीय परियोजना के झरियानाला गेट पर हुई। इसमें आठ व नौ जनवरी को होने वाले राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का निर्णय लिया गया। इलेक्ट्रिसिटी अमेडमेंट बिल 2018 एवं केंद्र व राज्य स्तर पर चल रही निजीकरण की कार्रवाई का विरोध किया गया। पुरानी पेंशन की बहाली की मांग उठाई गई।
यहां अभियंता संघ के केंद्रीय अध्यक्ष इं. जीके मिश्र व उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सदरुद्दीन राणा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकारें इलेक्ट्रिसिटी बिल लाकर ऊर्जा निगमों को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है। यदि इलेक्ट्रिसिटी बिल 2018 को संसद के शीतकालीन सत्र में पहले पारित कराने की कोशिश हुई तो बिना और कोई नोटिस दिए देश भर के बिजली कर्मचारी व इंजीनियर उसी समय लाइटनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में निजी घरानों के घोटाले से बैंकों का ढाई लाख करोड़ पहले ही फंसा हुआ है। फिर भी निजी घरानों पर कोई कार्रवाई करने की जगह केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आपूर्ति निजी घरानों को सौंप कर और बड़े घोटाले की तैय्यारी कर रही है। बिल पारित हो गया तो सब्सिडी और क्रास सब्सिडी तीन साल में खत्म हो जाएगी। इससे किसानों और आम उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो जाएगी। जबकि उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों की बिजली दरों में कमी की जाएगी। उन्होंने कहा कि घाटे के नाम पर बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है। सभा को अजय सिंह, दिनेश यादव, इं. अदालत वर्मा, ओबरा एसडीओ इं. विवेक कुमार, सत्य प्रकाश, लालचंद, शाहिद अख्तर, विजय सिंह ने भी संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता पशुपति नाथ विश्वकर्मा व संचालन योगेंद्र प्रसाद ने किया। यहां बीएन सिंह, एचएन पांडेय, वकार अहमद, शमशाद, राजीव कुमार, राजाराम, नरसिंह त्रिपाठी, बीडी तिवारी, मनोज कुमार, संत विजय चंद्रा, धर्मेंद्र शर्मा, प्रभात पांडेय, अजीत साहू, लालता तिवारी मौजूद रहे।
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यहां अभियंता संघ के केंद्रीय अध्यक्ष इं. जीके मिश्र व उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सदरुद्दीन राणा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकारें इलेक्ट्रिसिटी बिल लाकर ऊर्जा निगमों को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है। यदि इलेक्ट्रिसिटी बिल 2018 को संसद के शीतकालीन सत्र में पहले पारित कराने की कोशिश हुई तो बिना और कोई नोटिस दिए देश भर के बिजली कर्मचारी व इंजीनियर उसी समय लाइटनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में निजी घरानों के घोटाले से बैंकों का ढाई लाख करोड़ पहले ही फंसा हुआ है। फिर भी निजी घरानों पर कोई कार्रवाई करने की जगह केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आपूर्ति निजी घरानों को सौंप कर और बड़े घोटाले की तैय्यारी कर रही है। बिल पारित हो गया तो सब्सिडी और क्रास सब्सिडी तीन साल में खत्म हो जाएगी। इससे किसानों और आम उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो जाएगी। जबकि उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों की बिजली दरों में कमी की जाएगी। उन्होंने कहा कि घाटे के नाम पर बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है। सभा को अजय सिंह, दिनेश यादव, इं. अदालत वर्मा, ओबरा एसडीओ इं. विवेक कुमार, सत्य प्रकाश, लालचंद, शाहिद अख्तर, विजय सिंह ने भी संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता पशुपति नाथ विश्वकर्मा व संचालन योगेंद्र प्रसाद ने किया। यहां बीएन सिंह, एचएन पांडेय, वकार अहमद, शमशाद, राजीव कुमार, राजाराम, नरसिंह त्रिपाठी, बीडी तिवारी, मनोज कुमार, संत विजय चंद्रा, धर्मेंद्र शर्मा, प्रभात पांडेय, अजीत साहू, लालता तिवारी मौजूद रहे।
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