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सर्दी-खांसी और जुकाम को सामान्य समझ न करें नजरअंदाज, हो सकता है इंफ्लूएंजा संक्रमण
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सोनभद्र। कई दिन तक सर्दी, खांसी और जुकाम रहने पर लापरवाही न बरतें। यह इंफ्लूएंजा का संक्रमण भी हो सकता है। यह एक तरह का वायरस है जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इसकी शुरुआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ होती है। इंफ्लूएंजा वायरस नाक, आंख व मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि अक्सर सर्दी, खांसी जैसे लक्षणों को लोग सामान्य समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सर्दियों के मौसम में अन्य संक्रमण के मुकाबले इंफ्लूएंजा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह बीमारी इनफ्लुएंजा वायरस से होती है जो सर्दियों में अधिक सक्रिय रहता है। कोविड-19 दौर में इस तरह की लापरवाही नुकसानदेह साबित हो सकती है। वायरस श्वसन तंत्र नाक, गला और फेफड़ों में संक्रमण फैलाता है। हालांकि यह भी एक सामान्य फ्लू ही है। इसके अधिकतर मामले एक से डेढ़ सप्ताह में अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभी इसके कारण होने वाली जटिलताएं परेशानी का सबब बन जाती है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति को आराम और संतुलित आहार लेना चाहिए। तरल पदार्थों का सेवन संक्रमण ठीक करने में बहुत मददगार होता है। संक्रमण से 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले और कमजोर इम्यूनिटी वाले और गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति को अधिक खतरा होता है। ऐसे में सर्दी, जुकाम व खांसी होने पर कदापि लापरवाही न बरतें।
बुखार और उल्टी आना, ठंड लगना और पसीना आना, सिर में दर्द होना ,सूखी खांसी आना, कमजोरी और थकान महसूस होना, नाक बंद होना एवं गले में खराश, आंखों में दर्द होना और मांस पेशियों एवं जोड़ों में दर्द होना यह प्रमुख लक्षण है।
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समय-समय पर हाथ को धोते रहना चाहिए। आंख नाक और मुंह को छूने से बचें। छींकते और खांसते समय रुमाल का इस्तेमाल करें। फ्लू के सीजन में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचे।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि अक्सर सर्दी, खांसी जैसे लक्षणों को लोग सामान्य समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सर्दियों के मौसम में अन्य संक्रमण के मुकाबले इंफ्लूएंजा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह बीमारी इनफ्लुएंजा वायरस से होती है जो सर्दियों में अधिक सक्रिय रहता है। कोविड-19 दौर में इस तरह की लापरवाही नुकसानदेह साबित हो सकती है। वायरस श्वसन तंत्र नाक, गला और फेफड़ों में संक्रमण फैलाता है। हालांकि यह भी एक सामान्य फ्लू ही है। इसके अधिकतर मामले एक से डेढ़ सप्ताह में अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभी इसके कारण होने वाली जटिलताएं परेशानी का सबब बन जाती है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति को आराम और संतुलित आहार लेना चाहिए। तरल पदार्थों का सेवन संक्रमण ठीक करने में बहुत मददगार होता है। संक्रमण से 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले और कमजोर इम्यूनिटी वाले और गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति को अधिक खतरा होता है। ऐसे में सर्दी, जुकाम व खांसी होने पर कदापि लापरवाही न बरतें।
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बुखार और उल्टी आना, ठंड लगना और पसीना आना, सिर में दर्द होना ,सूखी खांसी आना, कमजोरी और थकान महसूस होना, नाक बंद होना एवं गले में खराश, आंखों में दर्द होना और मांस पेशियों एवं जोड़ों में दर्द होना यह प्रमुख लक्षण है।
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समय-समय पर हाथ को धोते रहना चाहिए। आंख नाक और मुंह को छूने से बचें। छींकते और खांसते समय रुमाल का इस्तेमाल करें। फ्लू के सीजन में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचे।