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रोजगार के लिए विस्थापितों ने परियोजना प्रबंधन के खिलाफ किया प्रदर्शन
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शक्तिनगर। एनसीएल कृष्णशिला कोयला परियोजना महाप्रबंधक कार्यालय पर बुधवार को रोजगार के लिए विस्थापित बेरोजगारों नेे कोयला प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। बेरोजगारों की मांग थी कि प्रोजेक्ट के कार्य में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाए। कोरोना कर्फ्यू के बीच ऊर्जांचल में प्रदर्शन का यह दूसरा दिन था। इससे पहले मंगलवार को एनसीएल दुद्धीचुआ के जीएम आफिस पर संविदा कामगारों ने पगार के लिए प्रदर्शन किया था।
बुधवार को घरसड़ी, चंदुआर, जमशीला, बरवानी, बांसी, कोहरौलिया आदि गांवों के परियोजना विस्थापित परिवारों के बेरोजगार एकजुट होकर जीएम कार्यालय के सामने नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि कोल प्रबंधन उनके साथ नाइंसाफी कर रहा है। आरोप यह था कि कृष्णशिला परियोजना के कोल हैैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) में विस्थापित बेरोजगारों को समायोजित नहीं किया जा रहा है। विस्थापित श्रमिक संगठन के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में नाराज विस्थापितों की मांग थी कि एनसीएल कृष्णशिला परियोजना की सीएचपी में 20 प्रतिशत को रोजगार मुहैया कराया जाए। वक्ताओं ने कहा कि कोरोना संकट में विस्थापितों के सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। घंटे भर से अधिक समय तक मुख्य द्वार पर विस्थापितों के प्रदर्शन करने से आनेजाने वाले कर्मचारियों/अधिकारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रबंधन की सूचना पर मौके पर पहुंची बीना चौकी पुलिस ने विस्थापितों की समस्या सुनी। इसके बाद वार्ता का प्रस्ताव आया।
प्रबंधन के आश्वासन पर बनी बात
शक्तिनगर। बेरोजगारों के तेवर देख पुलिस ने बीचबचाव किया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए पांच विस्थापितों की प्रबंधन से वार्ता कराई गई। इस दौरान विस्थापितों ने प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा। कृष्णशिला परियोजना प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि विस्थापित परिवार के सदस्यों के कागजात का अवलोकन करने के बाद रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान मुख्य रूप से संतोष दुबे, अजेंन दुबे, संजय गुप्ता, उपेंद्र दुबे, लाल साहब, अशोक, रामजी गुप्ता, दीपू गुप्ता सहित कई विस्थापित परिवार सदस्य मौजूद रहे।
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बुधवार को घरसड़ी, चंदुआर, जमशीला, बरवानी, बांसी, कोहरौलिया आदि गांवों के परियोजना विस्थापित परिवारों के बेरोजगार एकजुट होकर जीएम कार्यालय के सामने नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि कोल प्रबंधन उनके साथ नाइंसाफी कर रहा है। आरोप यह था कि कृष्णशिला परियोजना के कोल हैैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) में विस्थापित बेरोजगारों को समायोजित नहीं किया जा रहा है। विस्थापित श्रमिक संगठन के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में नाराज विस्थापितों की मांग थी कि एनसीएल कृष्णशिला परियोजना की सीएचपी में 20 प्रतिशत को रोजगार मुहैया कराया जाए। वक्ताओं ने कहा कि कोरोना संकट में विस्थापितों के सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। घंटे भर से अधिक समय तक मुख्य द्वार पर विस्थापितों के प्रदर्शन करने से आनेजाने वाले कर्मचारियों/अधिकारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रबंधन की सूचना पर मौके पर पहुंची बीना चौकी पुलिस ने विस्थापितों की समस्या सुनी। इसके बाद वार्ता का प्रस्ताव आया।
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प्रबंधन के आश्वासन पर बनी बात
शक्तिनगर। बेरोजगारों के तेवर देख पुलिस ने बीचबचाव किया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए पांच विस्थापितों की प्रबंधन से वार्ता कराई गई। इस दौरान विस्थापितों ने प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा। कृष्णशिला परियोजना प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि विस्थापित परिवार के सदस्यों के कागजात का अवलोकन करने के बाद रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान मुख्य रूप से संतोष दुबे, अजेंन दुबे, संजय गुप्ता, उपेंद्र दुबे, लाल साहब, अशोक, रामजी गुप्ता, दीपू गुप्ता सहित कई विस्थापित परिवार सदस्य मौजूद रहे।
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