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भक्ति, लक्ष्मी स्वरूपा हैं सीता ः अच्युतानंद
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Tue, 29 Dec 2015 11:37 PM IST
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राबर्ट्सगंज स्थित आरटीएस क्लब प्रांगण में सोमवार की रात हुए प्रवचन में वाराणसी से पधारे पं. अच्युतानंद पाठक ने सीता का परिचय देते हुए कहा कि शांति का प्रतीक भक्ति और लक्ष्मी स्वरूपा सीता है।
उन्होंने कहा कि शांति स्वरूपा सीता का विवाह करके अवधपुरी आने पर मिट नव मंगल मोद बधाए, अर्थात अवधपुरी सदा आमोदित हो गई। गोरखपुर से पधारे पं. हेमंत त्रिपाठी ने धनुष यज्ञ प्रसंग कढा वर्णन करते हुए कहा कि देश-विदेश से स्वयंवर में पहुंचे राजाओं में पहले धनुष तोड़ने की होड़ लग गई। लेकिन सभी का प्रयास विफल रहा और अंत में एक साथ ही सभी लोगों ने धनुष तोड़ने का प्रयास किया, फिर भी सफल नहीं हुए। ऐसा देखकर राजा जनक घबरा गए। पं. रामेश्वर तिवारी, डॉ.कृष्णानंद, पं. संतोष आदि मौजूद रहे
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उन्होंने कहा कि शांति स्वरूपा सीता का विवाह करके अवधपुरी आने पर मिट नव मंगल मोद बधाए, अर्थात अवधपुरी सदा आमोदित हो गई। गोरखपुर से पधारे पं. हेमंत त्रिपाठी ने धनुष यज्ञ प्रसंग कढा वर्णन करते हुए कहा कि देश-विदेश से स्वयंवर में पहुंचे राजाओं में पहले धनुष तोड़ने की होड़ लग गई। लेकिन सभी का प्रयास विफल रहा और अंत में एक साथ ही सभी लोगों ने धनुष तोड़ने का प्रयास किया, फिर भी सफल नहीं हुए। ऐसा देखकर राजा जनक घबरा गए। पं. रामेश्वर तिवारी, डॉ.कृष्णानंद, पं. संतोष आदि मौजूद रहे
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