{"_id":"573230994f1c1bac0691983b","slug":"development-sought-a-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"283 गांवों में विकास कार्यों की रिपोर्ट तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
283 गांवों में विकास कार्यों की रिपोर्ट तलब
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Wed, 11 May 2016 12:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के नक्सल प्रभावित 283 गांवों में विकास कार्यों की रिपोर्ट एसपी ने तलब की है। सभी सीओ और थाना प्रभारियों को नक्सल गांवों में सड़क, बिजली, आवास, चिकित्सा स्वास्थ्य सहित उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की जानकारी मांगी है। कमियां मिलने पर गांवों के नाम और सुझाव शासन को भेजा जाएगा। वर्ष 2004 में गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव संगीता गिरील की रिपोर्ट पर सोनभद्र को नक्सल प्रभावित जिले का दर्जा मिला था। राबर्ट्सगंज, करमा, घोरावल, शाहगंज, पन्नूगंज, रायपुर, मांची, रामपुर बरकोनिया, चोपन, कोन जुगैल, हाथीनाला, दुद्धी, म्यारेपुर, बभनी, विढमगंज और बीजपुर थाने के 283 गांव अति नक्सल के रूप में चयनित हुए थे।
कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत नक्सल गांवों में पुलिस जन चौपाल लगाकर जनता की समस्याएं दूर करने के साथ उन्हें इमदाद बांटती आई है। वर्ष 2012 में जिले से नक्सल गतिविधियां पूरी तरह से खत्म हो गईं। विकास के नाम पर आने वाले धन का बंदरबांट होता रहा। पुलिस विभाग कम्युनिटी के नाम पर नाम मात्र का इमदाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बांटती रही।
विज्ञापन
कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत नक्सल गांवों में पुलिस जन चौपाल लगाकर जनता की समस्याएं दूर करने के साथ उन्हें इमदाद बांटती आई है। वर्ष 2012 में जिले से नक्सल गतिविधियां पूरी तरह से खत्म हो गईं। विकास के नाम पर आने वाले धन का बंदरबांट होता रहा। पुलिस विभाग कम्युनिटी के नाम पर नाम मात्र का इमदाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बांटती रही।
विज्ञापन