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Sonebhadra News: 4 दिन बाद आया सिलिंडर तो पाने के लिए उमड़े उपभोक्ता
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रॉबर्ट्सगंज हाइडिल मैदान में गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं की लगी लंबी कतार। संवाद
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सोनभद्र। ईरान में जंग के चलते आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ाने से जिले के उपभोक्ता हर दिन सिलिंडर के लिए जंग करते नजर आ रहे हैं। कोई गैस सिलिंडर की बुकिंग कराने के लिए जूझ रहा है तो कोई सिलिंडर पाने के लिए परेशान है। मंगलवार को रॉबर्ट्सगंज में चार दिन बाद गैस सिलिंडर की खेप पहुंचते ही उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। तीखी धूप के बीच हाइडिल मैदान में कतार लगाकर महिला-पुरुष सिलिंडर के लिए खड़े रहे। घंटे भर इंतजार के बाद उन्हें सिलिंडर मिल सका।
पिछले 20 दिनों से गैस सिलिंडर के लिए लोग परेशान हैं। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति नहीं होने से होटल, ढाबा, रेस्टूरेंट चलाने वाले लकड़ी व कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं। वहीं आम उपभोक्ता के सामने भी हालात ऐसे ही होते जा रहे हैं। बुकिंग के लिए 25 से 45 दिनों की बाध्यता होने और फिर घर तक डिलीवरी बाधित होने से उपभोक्ता खुद सिलिंडर लेकर एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं। मंगलवार को रॉबर्ट्सगंज के हाइडिल मैदान में सिलिंडर के लिए उमड़ी भीड़ लोगों की परेशानी बयां कर रही थी। दूसरे काम छोड़कर महिला-पुरुष लंबी कतारों में खड़े होकर सिलिंडर मिलने का इंतजार करते रहे।
गेंगुआर निवासी उपभोक्ता संजय ने बताया कि कई दिन प्रयास के बाद पहले तो बुकिंग हुई। फिर चार दिन से सिलिंडर नहीं आ रहा था। मंगलवार सुबह से ही लाइन में लगकर सिलिंडर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अंबेडकरनगर निवासी कमलेश, न्यू कॉलोनी निवासी राजकुमार की भी कुछ ऐसी पीड़ा थी। बताया कि पहले आसानी से घर पर ही सिलिंडर मिल जाता था। अब बुकिंग कराने के बाद भी लाइन लगानी पड़ रही है। सिलिंडर की व्यवस्था जरूरी है, इसलिए काम छोड़कर यहां आए हैं। कांशीराम आवास निवासी विजय गिरि का कहना था कि एजेंसी संचालक की ओर से घर तक आपूर्ति की बात कही जा रही है, लेकिन चार दिन तक इंतजार के बाद भी सिलिंडर न मिलने पर यहां आना पड़ा है।
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बच्चों को पढ़ाएं या सिलिंडर के लिए लाइन लगाएं
कतार में कई विद्यालयों के शिक्षक भी खड़े थे। नाम न छापने की शर्त पर उनका कहना था कि स्कूल में एमडीएम बनाने के लिए गैस सिलिंडर का कनेक्शन है, लेकिन किल्लत के चलते गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही। नियमित भोजन गैस सिलिंडर पर ही बनना है। अगर लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करते हैं तो कार्रवाई की बात कही जाती है। अब सिलिंडर के लिए लाइन लगाएं या फिर स्कूल में बच्चों को पढ़ाएं।
गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर नजर रखी जा रही है। उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए सभी एजेंसी संचालकों को नियमानुसार वितरण के निर्देश दिए गए हैं। अगर कोई जानबूझकर किल्लत या कालाबाजारी करता है तो उसकी सूचना दें, तुरंत कार्रवाई की जाएगी। -पृथ्वी सिंह, एआरओ, मुख्यालय।
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पिछले 20 दिनों से गैस सिलिंडर के लिए लोग परेशान हैं। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति नहीं होने से होटल, ढाबा, रेस्टूरेंट चलाने वाले लकड़ी व कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं। वहीं आम उपभोक्ता के सामने भी हालात ऐसे ही होते जा रहे हैं। बुकिंग के लिए 25 से 45 दिनों की बाध्यता होने और फिर घर तक डिलीवरी बाधित होने से उपभोक्ता खुद सिलिंडर लेकर एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं। मंगलवार को रॉबर्ट्सगंज के हाइडिल मैदान में सिलिंडर के लिए उमड़ी भीड़ लोगों की परेशानी बयां कर रही थी। दूसरे काम छोड़कर महिला-पुरुष लंबी कतारों में खड़े होकर सिलिंडर मिलने का इंतजार करते रहे।
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गेंगुआर निवासी उपभोक्ता संजय ने बताया कि कई दिन प्रयास के बाद पहले तो बुकिंग हुई। फिर चार दिन से सिलिंडर नहीं आ रहा था। मंगलवार सुबह से ही लाइन में लगकर सिलिंडर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अंबेडकरनगर निवासी कमलेश, न्यू कॉलोनी निवासी राजकुमार की भी कुछ ऐसी पीड़ा थी। बताया कि पहले आसानी से घर पर ही सिलिंडर मिल जाता था। अब बुकिंग कराने के बाद भी लाइन लगानी पड़ रही है। सिलिंडर की व्यवस्था जरूरी है, इसलिए काम छोड़कर यहां आए हैं। कांशीराम आवास निवासी विजय गिरि का कहना था कि एजेंसी संचालक की ओर से घर तक आपूर्ति की बात कही जा रही है, लेकिन चार दिन तक इंतजार के बाद भी सिलिंडर न मिलने पर यहां आना पड़ा है।
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कतार में कई विद्यालयों के शिक्षक भी खड़े थे। नाम न छापने की शर्त पर उनका कहना था कि स्कूल में एमडीएम बनाने के लिए गैस सिलिंडर का कनेक्शन है, लेकिन किल्लत के चलते गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही। नियमित भोजन गैस सिलिंडर पर ही बनना है। अगर लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करते हैं तो कार्रवाई की बात कही जाती है। अब सिलिंडर के लिए लाइन लगाएं या फिर स्कूल में बच्चों को पढ़ाएं।
गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर नजर रखी जा रही है। उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए सभी एजेंसी संचालकों को नियमानुसार वितरण के निर्देश दिए गए हैं। अगर कोई जानबूझकर किल्लत या कालाबाजारी करता है तो उसकी सूचना दें, तुरंत कार्रवाई की जाएगी। -पृथ्वी सिंह, एआरओ, मुख्यालय।