{"_id":"579262374f1c1b3859c4bd49","slug":"curruption-in-recruitment-of-security-guard","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति में धांधली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति में धांधली
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Fri, 22 Jul 2016 11:43 PM IST
विज्ञापन
सिक्योरिटी गार्ड
- फोटो : demo pics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कोल प्रोजेक्टों में सुरक्षा गार्डों की भर्ती में धांधली का मामला सामने आया है। पूर्व सैनिकों के फर्जी दस्तावेजों के जरिए सामान्य लोग भर्ती कर लिए गए हैं। इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की डायरेक्टर जनरल आफ रिसेटलमेंट (डीजीआर) के जरिए पूर्व सैनिकों को सार्वजनिक उपक्रमों में नियोजित किए जाने की योजना है। इसी के तहत बीते माह एनसीएल में पंजीकृत अंबाला, राजस्थान, लखनऊ, भोपाल, गाजियाबाद, दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियों को अलग-अलग कोयला प्रोजेक्टों और कंपनी मुख्यालय के सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इसके बाद एजेंसी के लोग परदे के पीछे हो गए और इलाके में कोल, कबाड़ और डीजल के धंधे से जुड़े (सीकेडी ग्रुप) के लोगों को अपरोक्ष रूप से इसकी कमान सौंप दी, जिनके दामन पहले से दागदार थे। कुछ दिन पहले इसका पता चला तो एनसीएल के अधिकारी सतर्क हो गए। जांच की कवायद देख खड़िया सहित कई परियोजनाओं में सालों से सुरक्षा के नाम पर सीकेडी सिंडिकेट को खाद-पानी देने वाले भूमिगत हो गए। कुछ दिन पूर्व जयंत में पूर्व सैनिकों के फर्जी दस्तावेजों के जरिए सामान्य लोगों को भर्ती किए जाने का मामला सामने आया तो हड़कंप मच गया।
बात सिंगरौली के एसपी रूडोल्फ अल्वारेस तक पहुंची तो उन्होंने मातहतों को दस्तावेजों की जांच के आदेश दे दिए। यह देख खुद को पूर्व सैनिक बताने वाले छह लोग फरार हो गए। बताते चलें कि एनसीएल निजी सुरक्षा गार्डों के नाम पर सालाना करीब 50 करोड़ खर्च करती है। इससे यूपी और एमपी क्षेत्र में कुल 1178 गार्डों की तैनाती होती है।
विज्ञापन
इसके बाद एजेंसी के लोग परदे के पीछे हो गए और इलाके में कोल, कबाड़ और डीजल के धंधे से जुड़े (सीकेडी ग्रुप) के लोगों को अपरोक्ष रूप से इसकी कमान सौंप दी, जिनके दामन पहले से दागदार थे। कुछ दिन पहले इसका पता चला तो एनसीएल के अधिकारी सतर्क हो गए। जांच की कवायद देख खड़िया सहित कई परियोजनाओं में सालों से सुरक्षा के नाम पर सीकेडी सिंडिकेट को खाद-पानी देने वाले भूमिगत हो गए। कुछ दिन पूर्व जयंत में पूर्व सैनिकों के फर्जी दस्तावेजों के जरिए सामान्य लोगों को भर्ती किए जाने का मामला सामने आया तो हड़कंप मच गया।
विज्ञापन
बात सिंगरौली के एसपी रूडोल्फ अल्वारेस तक पहुंची तो उन्होंने मातहतों को दस्तावेजों की जांच के आदेश दे दिए। यह देख खुद को पूर्व सैनिक बताने वाले छह लोग फरार हो गए। बताते चलें कि एनसीएल निजी सुरक्षा गार्डों के नाम पर सालाना करीब 50 करोड़ खर्च करती है। इससे यूपी और एमपी क्षेत्र में कुल 1178 गार्डों की तैनाती होती है।
विज्ञापन