{"_id":"5ba13fa9867a55787b02779a","slug":"151537294249-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लकड़ी तस्करों को करें चिह्नित","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
लकड़ी तस्करों को करें चिह्नित
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुद्धी। मुख्य वन संरक्षक प्रभाकर दुबे ने मंगलवार को रेणुकूट वन प्रभाग कार्यालय में वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। यहां जंगलों के अवैध कटान पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया। कहा कि लकड़ी तस्करों को चिह्नित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। धारा 20 की जमीन में यदि कोई अतिक्रमण करता है तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए। यह भी निर्देश दिया कि वन भूमि में किसी तरह का खनन न होने पाए।
बैठक करने के बाद मुख्य वन संरक्षक दुद्धी डाक बंगले पहुंचे। वहां उन्होंने हाईटेक कार्बन के नाम दिए गए वन भूमि की लीज को अब एसकेआई कार्बन के नाम पट्टा अभिलेख का नवीनीकरण के पंजीकरण के एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर कर स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने एसकेआई कार्बन के यूनिट हेड जेपीएन सिंह के साथ वन भूमि के दिये हुए पट्टे के अभिलेख का नवीनीकरण के पंजीकरण के स्टांप पेपर पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किया। दुबे ने बताया कि हाई टेक कार्बन को वन विभाग ने 17.267 हेक्टेयर भूमि 2011 में लीज पर दिया गया, जिसकी अवधि 21 जुलाई 2035 तक है। लेकिन हाई टेक कार्बन कंपनी अब एसकेआई कार्बन के नाम से हो गयी है। इसलिए कानूनी तौर पर दिए लीज को नए नाम पर पंजीकृत किया जा रहा है। अब आज से एसकेआई कार्बन को 17.267 हेक्टेयर भूमि का पट्टा 16 साल 10 महीने चार दिन शेष रह गया है। कंपनी के यूनिट हेड जेपीएन सिंह ने बताया कि कंपनी के बाई प्रोडक्ट से पॉवर पैदा की जाती है। पॉवर को ग्रीड के जरिये रिहंद तक भेजा जाता है। कंपनी से रिहंद तक जाने में वन भूमि में ग्रिड टॉवर लगाए गए है, जो वन भूमि टॉवर ग्रिड लाइन के नीचे पड़ती है उसका पट्टा वन विभाग से लिया गया है। वन संरक्षक ने बताया कि कंपनी ने वन भूमि के पट्टा लेने के एवज में 47 लाख की डिपोजिटरी दी है उसके अलावा चार लाख रुपये प्रति वर्ष का रेंट भी प्रदान करती है। इस दौरान डीएफओ महेंद्र प्रताप सिंह, एसडीओ मनमोहन मिश्रा, रेंजर विजेंद्र श्रीवास्तव, आरपी चौहान मौजूद रहे।
विज्ञापन
बैठक करने के बाद मुख्य वन संरक्षक दुद्धी डाक बंगले पहुंचे। वहां उन्होंने हाईटेक कार्बन के नाम दिए गए वन भूमि की लीज को अब एसकेआई कार्बन के नाम पट्टा अभिलेख का नवीनीकरण के पंजीकरण के एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर कर स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने एसकेआई कार्बन के यूनिट हेड जेपीएन सिंह के साथ वन भूमि के दिये हुए पट्टे के अभिलेख का नवीनीकरण के पंजीकरण के स्टांप पेपर पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किया। दुबे ने बताया कि हाई टेक कार्बन को वन विभाग ने 17.267 हेक्टेयर भूमि 2011 में लीज पर दिया गया, जिसकी अवधि 21 जुलाई 2035 तक है। लेकिन हाई टेक कार्बन कंपनी अब एसकेआई कार्बन के नाम से हो गयी है। इसलिए कानूनी तौर पर दिए लीज को नए नाम पर पंजीकृत किया जा रहा है। अब आज से एसकेआई कार्बन को 17.267 हेक्टेयर भूमि का पट्टा 16 साल 10 महीने चार दिन शेष रह गया है। कंपनी के यूनिट हेड जेपीएन सिंह ने बताया कि कंपनी के बाई प्रोडक्ट से पॉवर पैदा की जाती है। पॉवर को ग्रीड के जरिये रिहंद तक भेजा जाता है। कंपनी से रिहंद तक जाने में वन भूमि में ग्रिड टॉवर लगाए गए है, जो वन भूमि टॉवर ग्रिड लाइन के नीचे पड़ती है उसका पट्टा वन विभाग से लिया गया है। वन संरक्षक ने बताया कि कंपनी ने वन भूमि के पट्टा लेने के एवज में 47 लाख की डिपोजिटरी दी है उसके अलावा चार लाख रुपये प्रति वर्ष का रेंट भी प्रदान करती है। इस दौरान डीएफओ महेंद्र प्रताप सिंह, एसडीओ मनमोहन मिश्रा, रेंजर विजेंद्र श्रीवास्तव, आरपी चौहान मौजूद रहे।
विज्ञापन