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Sonebhadra News: लागत बढ़ती गई, सड़क अधूरी रह गई

Sun, 15 Sep 2024 11:16 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2024 11:16 PM IST
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Costs increased, road remained incomplete
सोनभद्र। जिले में करीब तीन साल पहले चार सड़कों के निर्माण के लिए बजट जारी हुआ था। ये सड़कें आज भी अधूरी हैं। वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने से अटकी इन सड़कों के निर्माण की लागत बढ़ती जा रही है। कायदे से निर्माण कार्य से पहले ही एनओसी लेनी चाहिए, मगर ऐसा नहीं कर पहले टेंडर कर काम शुरू कराया गया, फिन एनओसी की प्रक्रिया शुरू हुई। ऐसे में अब एनओसी मिलती भी है तो उसी लागत में काम पूरा कर पाना मुमकिन नहीं होगा। एक तो 10 से 15 प्रतिशत तक सड़क निर्माण की लागत बढ़ी है, दूसरे काम हथियाने की होड़ में 25 से 30 प्रतिशत कम रेट पर टेंडर की वजह से भी निर्माण कार्य पर असर पड़ना तय है। बता दें कि वन विभाग के आपत्ति के कारण जिले में पीएमजीएसवाई की तीन सड़कों का काम रुका है। संवाद
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चार साल से सड़क का काम अधूरा



चोपन ब्लॉक में जुगैल मार्ग पर स्थित महलपुर से ओबरा बांध होते हुए परसोई जाने वाली सड़क के निर्माण के लिए वर्ष 2019-20 में शासन से धनराशि मंजूर हुई थी। इस सड़क का निर्माण पीएमजीएसवाई से होना है। चार साल बाद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। मुश्किल से चार-पांच किमी ही सड़क बनी है। शेष कार्य वन विभाग की आपत्ति के कारण रुका है। बीते चार साल में सड़क निर्माण की लागत भी बढ़ी है। ऐसे में यदि वन विभाग से एनओसी मिल भी जाती है तो चार साल पहले की लागत में सड़क का निर्माण करा पाना मुश्किल होगा।
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आपत्ति के कारण रुका है सड़क का निर्माण



प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत म्योरपुर ब्लॉक के आरएस रोड सिधहवा से मिर्चाधुरी संपर्क मार्ग तक बन रही करीब 20 किलोमीटर लंबी सड़क समय सीमा बीतने के चार साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद मार्ग पर पड़ने वाले घघवा नदी पर पुल का निर्माण तो हो गया है मगर अभी तीन-चार स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सैद्धांतिक सहमति तो मिल गई है, मगर अभी तक वर्किंग सहमति नहीं मिली है। इस नाते वन विभाग की आपत्ति से रुका काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
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पटवध-बसुहारी मार्ग का भी रुका है काम



चोपन ब्लॉक के पटवध से बसुहारी तक करीब 61 किमी सड़क का निर्माण कार्य होना है। करीब 41 किमी सड़क का कार्य हो गया है। मगर, 20 किमी का कार्य वन विभाग की आपत्ति के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है। यह मुख्य सड़क दर्जनों पहाड़ी ग्रामीण अंचलों के साथ बिहार बार्डर को जोड़ती है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सड़क मरम्मत नहीं होने से रात में ग्रामीणों को सबसे अधिक समस्याएं हो रही हैं। हाल ही में शासन की तरफ से पटवध से बसुहारी मार्ग को प्रमुख जिला मार्ग श्रेणी में घोषित किया है।

एनओसी मिलने पर दो सड़कों का काम पूरा



वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद दो सड़कों पर काम पूरा हो गया है। नगवां ब्लॉक अंतर्गत सूअरसोत और मकरीबारी में सड़क का निर्माण कार्य वन विभाग की आपत्ति के कारण रुका था। वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद दोनों सड़कों का निर्माण कार्य पिछले साल पूरा हुआ है।



बिलो टेंडर की वजह से हो सकती है दिक्कत

जिले में काम हथियाने के लिए बिलो टेंडर का खेल जोरों पर है। सड़कों का निर्माण हो या फिर सरकारी भवनों का काम ठेकेदार 20 से 30 प्रतिशत बिलो टेंडर डालकर काम ले रहे हैं। चार साल पहले जिन सड़कों का टेंडर हुआ है, उसका काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। अब उस सड़क का निर्माण कार्य बढ़ी लागत की वजह से कराना मुश्किल होगा। हालांकि सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ नहीं होने से निर्माण लागत बढ़ाने के लिए अभी आवेदन नहीं है।




जिन सड़कों के निर्माण के लिए टेंडर पूर्व में हुआ है, संबंधित ठेकेदार को उसी लागत में सड़क का निर्माण कराना होता है। टेंडर रिवाइज होने का प्रावधान नहीं है। 2017 के रेट पर भी काम हो रहा है। पहले दोबारा टेंडर करने की अनुमति भी नहीं थी। ठेकेदार के अनुरोध पर शासन स्तर से ही लागत बढ़ाई जा सकती है। सड़कों की एनओसी की प्रक्रिया चल रही है, जल्द एनओसी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद शेष कार्य कराया जाएगा। -प्रशांत यादव, एक्सईएन-पीएमजीएसवाई।
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