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Sonebhadra News: बजट की कमी के कारण आठ प्रयोगशालाओं का निर्माण रुका
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कागजी दांव-पेंच में फंसे कई स्कूलों में इंटर के छात्र-छात्राओं को बिना प्रैक्टिकल के ही हर साल कई विषयों को पढ़ना मजबूरी बन गया है। जिले में कम बजट के कारण आठ प्रैक्टिकल लैब के निर्माण की प्रक्रिया तीन साल से अवरूद्ध है।
जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन 48 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज संचालित हैं। एक ओर कई ऐसे स्कूल हैं, जहां प्रायोगिक विषयों के शिक्षकों की कमी है तो कहीं प्रयोगशाला ही नहीं है।
प्रयोगात्मक परीक्षा से पूर्व बच्चों को जरूरी शिक्षा नहीं मिल पाती है। वर्ष 2022 में राजकीय इंटर कॉलेज घोरावल और राजकीय इंटर कॉलेज चपकी में रसायन, भौतिक, जीव विज्ञान की एक-एक लैब (कुल छह) और राजकीय इंटर कॉलेज कोन में जीव विज्ञान और भौतिक की लैब के निर्माण की पहल शुरू की गई थी।
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समग्र शिक्षा माध्यमिक कार्यक्रम के तहत शासन स्तर से तीन काॅलेजों में कुल आठ लैब निर्माण के लिए बजट जारी किया था। प्रत्येक लैब के लिए 13.50 लाख की दर से 1.08 करोड़ और उपकरणों की खरीद के लिए एक-एक लाख की दर से कुल आठ लाख रुपये मिले थे।
कई निर्माण संस्थाओं और कंपनियों ने कम बजट का हवाला देते हुए निर्माण कराने से हाथ खड़े कर दिए थे। ऐसे में इन स्कूलों के बच्चों को बिना लैब के ही प्रायोगिक विषयों की पढ़ाई करनी होती है।
मांग पत्र पर डेढ़ साल से अटकी कार्रवाई
जिले में मार्च-अप्रैल 2023 के आस-पास कई निर्माण कंपनियों और सरकारी विभागों की एक संयुक्त बैठक भी हुई थी। मगर सभी ने जब कम बजट का हवाला देते हुए कार्य से इंकार कर दिया तो शासन को निर्माण बजट की धनराशि में इजाफा करने के लिए पत्राचार किया गया था। इसके बाद विभाग ने मार्च 2024 में बजट भी सरेंडर कर दिया था। विभागीय जानकारों की मानें तो उस वक्त महंगाई को देखते हुए तय धनराशि में दोगुना इजाफे की मांग की गई थी। लंबा वक्त गुजरने के बाद भी इस पर कोई पहल नहीं हो सकी है। ऐसे में अनुमति के बाद यह तीसरा सत्र है। जहां के सैकड़ों छात्र प्रैक्टिकल की सुविधा से वंचित रहेंगे।
लैब के निर्माण में आ रही दिक्कतों से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया था। इसके बाद बजट भी सरेंडर हुआ था। मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। फाइलों के अवलोकन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। -जयराम सिंह, डीआईओएस।
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जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन 48 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज संचालित हैं। एक ओर कई ऐसे स्कूल हैं, जहां प्रायोगिक विषयों के शिक्षकों की कमी है तो कहीं प्रयोगशाला ही नहीं है।
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प्रयोगात्मक परीक्षा से पूर्व बच्चों को जरूरी शिक्षा नहीं मिल पाती है। वर्ष 2022 में राजकीय इंटर कॉलेज घोरावल और राजकीय इंटर कॉलेज चपकी में रसायन, भौतिक, जीव विज्ञान की एक-एक लैब (कुल छह) और राजकीय इंटर कॉलेज कोन में जीव विज्ञान और भौतिक की लैब के निर्माण की पहल शुरू की गई थी।
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समग्र शिक्षा माध्यमिक कार्यक्रम के तहत शासन स्तर से तीन काॅलेजों में कुल आठ लैब निर्माण के लिए बजट जारी किया था। प्रत्येक लैब के लिए 13.50 लाख की दर से 1.08 करोड़ और उपकरणों की खरीद के लिए एक-एक लाख की दर से कुल आठ लाख रुपये मिले थे।
कई निर्माण संस्थाओं और कंपनियों ने कम बजट का हवाला देते हुए निर्माण कराने से हाथ खड़े कर दिए थे। ऐसे में इन स्कूलों के बच्चों को बिना लैब के ही प्रायोगिक विषयों की पढ़ाई करनी होती है।
मांग पत्र पर डेढ़ साल से अटकी कार्रवाई
जिले में मार्च-अप्रैल 2023 के आस-पास कई निर्माण कंपनियों और सरकारी विभागों की एक संयुक्त बैठक भी हुई थी। मगर सभी ने जब कम बजट का हवाला देते हुए कार्य से इंकार कर दिया तो शासन को निर्माण बजट की धनराशि में इजाफा करने के लिए पत्राचार किया गया था। इसके बाद विभाग ने मार्च 2024 में बजट भी सरेंडर कर दिया था। विभागीय जानकारों की मानें तो उस वक्त महंगाई को देखते हुए तय धनराशि में दोगुना इजाफे की मांग की गई थी। लंबा वक्त गुजरने के बाद भी इस पर कोई पहल नहीं हो सकी है। ऐसे में अनुमति के बाद यह तीसरा सत्र है। जहां के सैकड़ों छात्र प्रैक्टिकल की सुविधा से वंचित रहेंगे।
लैब के निर्माण में आ रही दिक्कतों से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया था। इसके बाद बजट भी सरेंडर हुआ था। मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। फाइलों के अवलोकन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। -जयराम सिंह, डीआईओएस।