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सपा और अद प्रत्याशी के बीच होगी टक्कर, किसी ने नहीं मिला नाम वापस
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में मंगलवार को नाम वापसी के दौरान दिन भर कशमकश बनी रही। एक-दूसरे पर पर्चा वापसी के लिए दोनों की खेमे के लोग हरसंभव कोशिश में लगे रहे। इसे देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट रहा। कलेक्ट्रेट परिसर दिन भर छावनी में तब्दील रहा। अपराह्न तीन बजने तक किसी उम्मीदवार के नाम वापस न लेने पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई। प्रतिष्ठापरक कुर्सी पर सपा और अपना दल के बीच आमने-सामने का मुकाबला होगा।
जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान तीन जुलाई को होना है। इसके लिए नामांकन 26 जून को हुआ था। सात दावेदारों ने पर्चा खरीदा था, मगर बाद में सिर्फ दो ने ही नामांकन किया। कुर्सी अपने पाले में लाने के लिए सत्ताधारी खेमा लगातार कोशिश में जुटा हुआ है। कई जिलों में निर्विरोध निर्वाचन के बाद यहां भी ऐसे ही हालात बनाने में रणनीतिकार जुटे रहे। इसके लिए सपा खेमे पर नाम वापसी का दबाव दिया जाता रहा। दूसरी ओर चुनाव मैदान में मजबूती से डटे सपा के लोग भी अपना दल उम्मीदवार को मैदान से हटाने की रणनीति बनाते रहे। दोनों ओर से कशमकश का असर कलेक्ट्रेट पर भी देखा गया। खुफिया सूचना के बाद यहां सुबह से ही भारी फोर्स तैनात थी। चारों तरफ से कलेक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। हर आने जाने वाले पर पैनी निगाह रखी जा रही थी। राजमार्ग से कलेक्ट्रेट जाने वाले मार्ग पर दो स्थानों पर लगे अस्थायी बैरियर पर तैनात फोर्स सभी निगरानी कर रही थी। उधर कलेक्ट्रेट में नामांकन स्थल पर अपराह्न तीन बजे तक एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह मौजूद रहे लेकिन किसी प्रत्याशी ने पर्चा वापस नहीं लिया। इससे साफ हो गया है जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अपना दल की समर्थित राधिका पटेल और सपा के उम्मीदवार जय प्रकाश उर्फ चेखुर पांडेय के बीच सीधी टक्कर होगी। जिले का प्रथम नागरिक का दर्जा प्राप्त करने के लिए दोनों उम्मीदवारों ने पूरी ताकत झोंक दी है। उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए उनके संपर्क में लगे हुए हैं लेकिन कई सदस्यों के जिले में न होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं जिला प्रशासन ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
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जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान तीन जुलाई को होना है। इसके लिए नामांकन 26 जून को हुआ था। सात दावेदारों ने पर्चा खरीदा था, मगर बाद में सिर्फ दो ने ही नामांकन किया। कुर्सी अपने पाले में लाने के लिए सत्ताधारी खेमा लगातार कोशिश में जुटा हुआ है। कई जिलों में निर्विरोध निर्वाचन के बाद यहां भी ऐसे ही हालात बनाने में रणनीतिकार जुटे रहे। इसके लिए सपा खेमे पर नाम वापसी का दबाव दिया जाता रहा। दूसरी ओर चुनाव मैदान में मजबूती से डटे सपा के लोग भी अपना दल उम्मीदवार को मैदान से हटाने की रणनीति बनाते रहे। दोनों ओर से कशमकश का असर कलेक्ट्रेट पर भी देखा गया। खुफिया सूचना के बाद यहां सुबह से ही भारी फोर्स तैनात थी। चारों तरफ से कलेक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। हर आने जाने वाले पर पैनी निगाह रखी जा रही थी। राजमार्ग से कलेक्ट्रेट जाने वाले मार्ग पर दो स्थानों पर लगे अस्थायी बैरियर पर तैनात फोर्स सभी निगरानी कर रही थी। उधर कलेक्ट्रेट में नामांकन स्थल पर अपराह्न तीन बजे तक एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह मौजूद रहे लेकिन किसी प्रत्याशी ने पर्चा वापस नहीं लिया। इससे साफ हो गया है जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अपना दल की समर्थित राधिका पटेल और सपा के उम्मीदवार जय प्रकाश उर्फ चेखुर पांडेय के बीच सीधी टक्कर होगी। जिले का प्रथम नागरिक का दर्जा प्राप्त करने के लिए दोनों उम्मीदवारों ने पूरी ताकत झोंक दी है। उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए उनके संपर्क में लगे हुए हैं लेकिन कई सदस्यों के जिले में न होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं जिला प्रशासन ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
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