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रेल रैक से कोल आपूर्ति हुई बंद, कोयला संकट बरकरार
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महज डेढ़ दिन में ही रेल रैक से अनपरा परियोजना को कोयले की आपूर्ति बंद कर दिये जाने से निगम की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना में कोयला संकट गहराता जा रहा है। संकट की वजह रेलवे के पास रैक की कमी बताई जा रही है।
उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट की अनपरा परियोजना को सभी इकाइयों के संचालन की स्थिति में प्रतिदिन 40 हजार एमटी कोयले की आवश्यकता पड़ती है। पिछले एक माह से परियोजना को रेल रैक से कोयले की आपूर्ति बंद हो जाने से कोयले के स्टाक में निरंतर कमी दर्ज की जा रही थी। आलम यह रहा कि परियोजना के पास महज 10 दिन का कोयला शेष रह गया था। जबकि ऊर्जा मंत्रालय की नियमावली के अनुसार खदानों के मुहाने पर स्थित बिजलीघरों में भी कम से कम 15 दिन के लिए कोयले का स्टॉक रहना चाहिए। अंतत: उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के हस्तक्षेप के बाद परियोजना को शुक्रवार रात से रेल रैक से कोयले की आपूर्ति शुरू की गई। लेकिन महज डेढ़ दिन के अंतराल में ही रेलवे ने रैंक को अन्यत्र भेज दिया। बताया जाता है कि रविवार को अनपरा परियोजना को महज दो रैक ही कोयले की आपूर्ति हो सकी। ऐसे में स्टाक में कमी की समस्या जस की तस बनी हुई है।
अन्य परियोजनाओं में भी कोयला संकट
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में अनपरा के साथ निगम की अन्य परियोजनाएं भी कोयला संकट से दो-चार हो रही हैं। बताया जा रहा है कि इस समय कोयले का भुगतान भी क्लियर है। ऐसे में रैक की कमी बिजली घरों को समुचित कोयला आपूर्ति की राह में बाधक बनी हुई हैं।
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मांग बढ़ने से फुल लोड पर चल रहीं इकाइयां
गर्मी के प्रचंड स्वरूप के कारण इस समय सभी इकाईयों को फुल लोड पर चलाया जा रहा है। ऐसे में परियोजनाओं में कोयले की खपत बढ़ी हुई है। इस स्थिति में दैनिक आवश्यकता से कम कोल आपूर्ति से परियोजनाओं में कोयले का संकट गहराता जा रहा है।
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उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट की अनपरा परियोजना को सभी इकाइयों के संचालन की स्थिति में प्रतिदिन 40 हजार एमटी कोयले की आवश्यकता पड़ती है। पिछले एक माह से परियोजना को रेल रैक से कोयले की आपूर्ति बंद हो जाने से कोयले के स्टाक में निरंतर कमी दर्ज की जा रही थी। आलम यह रहा कि परियोजना के पास महज 10 दिन का कोयला शेष रह गया था। जबकि ऊर्जा मंत्रालय की नियमावली के अनुसार खदानों के मुहाने पर स्थित बिजलीघरों में भी कम से कम 15 दिन के लिए कोयले का स्टॉक रहना चाहिए। अंतत: उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के हस्तक्षेप के बाद परियोजना को शुक्रवार रात से रेल रैक से कोयले की आपूर्ति शुरू की गई। लेकिन महज डेढ़ दिन के अंतराल में ही रेलवे ने रैंक को अन्यत्र भेज दिया। बताया जाता है कि रविवार को अनपरा परियोजना को महज दो रैक ही कोयले की आपूर्ति हो सकी। ऐसे में स्टाक में कमी की समस्या जस की तस बनी हुई है।
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अन्य परियोजनाओं में भी कोयला संकट
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में अनपरा के साथ निगम की अन्य परियोजनाएं भी कोयला संकट से दो-चार हो रही हैं। बताया जा रहा है कि इस समय कोयले का भुगतान भी क्लियर है। ऐसे में रैक की कमी बिजली घरों को समुचित कोयला आपूर्ति की राह में बाधक बनी हुई हैं।
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मांग बढ़ने से फुल लोड पर चल रहीं इकाइयां
गर्मी के प्रचंड स्वरूप के कारण इस समय सभी इकाईयों को फुल लोड पर चलाया जा रहा है। ऐसे में परियोजनाओं में कोयले की खपत बढ़ी हुई है। इस स्थिति में दैनिक आवश्यकता से कम कोल आपूर्ति से परियोजनाओं में कोयले का संकट गहराता जा रहा है।