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सड़क मार्ग से आने लगा कोयला, फिर भी संकट से राहत नहीं
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अनपरा। राज्य उत्पादन निगम की अनपरा परियोजना में कोयले का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। कोल खदान के मुहाने पर स्थित इस परियोजना को सड़क मार्ग से कोयले की आपूर्ति तो शुरू हुई है, लेकिन बिजली की बढ़ी मांग के सापेक्ष परियोजना को पर्याप्त कोयला अभी भी नहीं मिल पा रही। अफसरों का मानना है कि रैल रैक शुरू होने तक संकट बना रहेगा।
कोयले की कमी को दूर करने के लिए पिछले दिनों उत्पादन निगम के एमडी पी. गुरुप्रसाद खुद अनपरा पहुंचे थे। एनसीएल के सीएमडी से मुलाकात कर कोयला आपूर्ति पर चर्चा की थी। वार्ता के बाद अनुबंध के तहत करीब पांच लाख एमटी कोयला सड़क मार्ग से देने पर बात बनी थी। सड़क मार्ग से कोयले की आपूर्ति शुरू भी हो गई है, लेकिन परियोजना की मांग को पूरा करने में सड़क मार्ग से आ रहा कोयला नाकाफी साबित हो रहा है। कुल 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना की सभी इकाइयों को चलाने के लिए रोजाना करीब 40 हजार एमटी कोयले की जरूरत है। इसके सापेक्ष परियोजना में 37-38 हजार एमटी ही कोयला पहुंच रहा है। एनसीएल ने अपनी तीनों खड़िया, बीना और दुद्धीचुआ खदान से सड़क मार्ग से आपूर्ति शुरू की है। इसे सड़क मार्ग से लाकर एनसीएल की ककरी खदान में गिराया जा रहा है। वहां से एमजीआर की रेल रैक से कोयले को परियोजना में पहुंचाया जा रहा है। उत्पादन निगम के एमडी ने एटीपी को 45 नई रेल बोगी देने का वादा किया है। इस रेल रैक के मिलने के बाद ही परियोजना का कोयला संकट कम हो पाएगा। वहीं वार्ता के बाद परियोजना की कमी को दूर करने के लिए एनसीएल ने भी अपनी लोडिंग टाइम में बढ़ोतरी कर दी है। शाम सात बजे ही बंद होने वाले लोडिंग प्वाइंट को एमडी के वार्तानुसार रात 10 बजे तक कर दिया गया है।
दो लाख एमटी के नीचे पहुंचा कोयले का स्टॉक : अनपरा। एटीपी में उत्पादनरत इकाइयों में अब भी कोयले का संकट बना हुआ है। बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग के बीच सभी कवायदें हाथ खड़े कर दे रही हैं। परियोजना में बचा कोयले का स्टॉक तेजी से नीचे आ रहा है। करीब 10 दिन पूर्व तक 2.70 लाख एमटी तक बचा कोयले का स्टॉक दो लाख एमटी से भी नीचे आ गया है। एनसीएल से की गई अधिक आपूर्ति की मांग भी परियोजना के स्टॉक को पूरा नहीं कर पा रही है। ऐसे मे परियोजना का संकट बरकरार है। रविवार को एटीपी में कोयले का स्टॉक 1.80 एमटी ही बचा है।
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कोयले की कमी को दूर करने के लिए पिछले दिनों उत्पादन निगम के एमडी पी. गुरुप्रसाद खुद अनपरा पहुंचे थे। एनसीएल के सीएमडी से मुलाकात कर कोयला आपूर्ति पर चर्चा की थी। वार्ता के बाद अनुबंध के तहत करीब पांच लाख एमटी कोयला सड़क मार्ग से देने पर बात बनी थी। सड़क मार्ग से कोयले की आपूर्ति शुरू भी हो गई है, लेकिन परियोजना की मांग को पूरा करने में सड़क मार्ग से आ रहा कोयला नाकाफी साबित हो रहा है। कुल 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना की सभी इकाइयों को चलाने के लिए रोजाना करीब 40 हजार एमटी कोयले की जरूरत है। इसके सापेक्ष परियोजना में 37-38 हजार एमटी ही कोयला पहुंच रहा है। एनसीएल ने अपनी तीनों खड़िया, बीना और दुद्धीचुआ खदान से सड़क मार्ग से आपूर्ति शुरू की है। इसे सड़क मार्ग से लाकर एनसीएल की ककरी खदान में गिराया जा रहा है। वहां से एमजीआर की रेल रैक से कोयले को परियोजना में पहुंचाया जा रहा है। उत्पादन निगम के एमडी ने एटीपी को 45 नई रेल बोगी देने का वादा किया है। इस रेल रैक के मिलने के बाद ही परियोजना का कोयला संकट कम हो पाएगा। वहीं वार्ता के बाद परियोजना की कमी को दूर करने के लिए एनसीएल ने भी अपनी लोडिंग टाइम में बढ़ोतरी कर दी है। शाम सात बजे ही बंद होने वाले लोडिंग प्वाइंट को एमडी के वार्तानुसार रात 10 बजे तक कर दिया गया है।
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दो लाख एमटी के नीचे पहुंचा कोयले का स्टॉक : अनपरा। एटीपी में उत्पादनरत इकाइयों में अब भी कोयले का संकट बना हुआ है। बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग के बीच सभी कवायदें हाथ खड़े कर दे रही हैं। परियोजना में बचा कोयले का स्टॉक तेजी से नीचे आ रहा है। करीब 10 दिन पूर्व तक 2.70 लाख एमटी तक बचा कोयले का स्टॉक दो लाख एमटी से भी नीचे आ गया है। एनसीएल से की गई अधिक आपूर्ति की मांग भी परियोजना के स्टॉक को पूरा नहीं कर पा रही है। ऐसे मे परियोजना का संकट बरकरार है। रविवार को एटीपी में कोयले का स्टॉक 1.80 एमटी ही बचा है।
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