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कोल इंडिया की नेक पहल: कर्मचारी की मासूम बेटी जूझ रही दुर्लभ बीमारी से, 16 करोड़ के इंजेक्शन का खर्च उठाएगी कंपनी
Thu, 18 Nov 2021 10:45 PM IST
उत्पल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
Published by: उत्पल कांत
Updated Thu, 18 Nov 2021 10:45 PM IST
सार
दुर्लभ बीमारी से जूझ रही मासूम सृष्टि को अब जल्द राहत मिल सकती है। बच्ची की इलाज का रास्ता साफ हो गया है। एसईसीएल कर्मी की बेटी को बचाने के लिए कोल इंडिया ने 16 करोड़ रुपए के इंजेक्शन लगाने की स्वीकृति दे दी है।
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दो साल की मासूम बच्ची सृष्टि
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोल इंडिया लिमिटेड ने दिल को छू लेने वाली एक पहल करते हुए अपने कोयला खनिक कर्मचारी की दो साल की मासूम बच्ची के इलाज के 16 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल ) के दीपका कोयला क्षेत्र में कार्यरत ओवरमैन सतीश कुमार रवि की बेटी सृष्टि रानी स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी नामक एक बेहद ही दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त है।
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इसका इलाज बेहद महंगा है और इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन की कीमत 16 करोड़ रुपये है। कोल इंडिया ने अपने कर्मी की बिटिया के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया सतीश जैसे कर्मी को अपनी बच्ची के इलाज के लिए इतनी ऊंची कीमत पर इंजेक्शन खरीद पाना संभव नहीं था।
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कोल इंडिया ने पेश की मिसाल
कोल इंडिया ने न सिर्फ अपने परिवार की बेटी की जान बचाने के लिए यह बड़ी पहल की है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य उपक्रमों और दूसरे संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करने की कोशिश की है।
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16 करोड़ रुपये का ‘जोलजेंस्मा’ इंजेक्शन
कोल कर्मचारी की बिटिया सृष्टि रानी को विदेश से आयात कर 16 करोड़ रुपये का ‘जोलजेंस्मा’ इंजेक्शन दिया जाना है। एम्स दिल्ली में इलाज के बाद सृष्टि फिलहाल अपने पिता के कार्यस्थल दीपका स्थित आवास में रह रही है, जहां उसे पोर्टेबल वेंटिलेटर पर रखा गया है।
22 नवंबर 2019 को अपने जन्म के छह महीने के भीतर ही सृष्टि काफी बीमार रहने लगी। इस बीच कोविड महामारी की वजह से उसके माता-पिता उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर नहीं ले जा सके और स्थानीय स्तर पर उसका इलाज चलता रहा। हालत में सुधार न होता देख पिता सृष्टि के इलाज के लिए सीएमसी वेल्लोर गए जहां जांच के बाद पता चला कि उसे ‘स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी’ है और उसे ‘जोलजेंस्मा’ इंजेक्शन की जरूरत है।
22 नवंबर 2019 को अपने जन्म के छह महीने के भीतर ही सृष्टि काफी बीमार रहने लगी। इस बीच कोविड महामारी की वजह से उसके माता-पिता उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर नहीं ले जा सके और स्थानीय स्तर पर उसका इलाज चलता रहा। हालत में सुधार न होता देख पिता सृष्टि के इलाज के लिए सीएमसी वेल्लोर गए जहां जांच के बाद पता चला कि उसे ‘स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी’ है और उसे ‘जोलजेंस्मा’ इंजेक्शन की जरूरत है।
30 दिसंबर 2020 को जब सतीश, सृष्टि को वेल्लोर से लेकर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला स्थित दीपका के अपने आवास लौट रहे थे तो रास्ते में ही सृष्टि की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उसे बिलासपुर के अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। वहां काफी समय इलाज चलने के बाद सतीश ने एम्स दिल्ली से सृष्टि का इलाज कराया। फिलहाल बच्ची का इलाज घर पर ही चल रहा है, जहां वह पोर्टेबल वेंटिलेटर पर है।
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