कोयला संकट: अनपरा तापीय परियोजनाओं में कोयले के साथ गहरा सकता है पानी का संकट, डैम में हर दिन कम हो रहा तीन इंच पानी
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सोनभद्र जिले की अनपरा तापीय परियोजनाओं में ऐसे ही कोयले की कमी बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब बिजली उत्पादन के लिए कोयले के साथ संयंत्रों को पानी की भी गंभीर समस्या से दो-चार होना पड़ सकता है। रिहंद हाइड्रो से लगातार विद्युत उत्पादन जारी रहने से रिहंद डैम में प्रतिदिन तीन इंच पानी कम हो रहा है।
रिहंद डैम के पानी से न सिर्फ 20 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता की तापीय परियोजनाओं का संचालन होता है बल्कि प्रदेश सरकार को आपात स्थिति में एक रुपये से भी कम प्रति यूनिट पर बिजली मुहैया कराने वाली 300 मेगावाट क्षमता की रिहंद हाइड्रो की छह व 99 मेगावाट क्षमता वाली ओबरा हाइड्रो तीन टरबाइनों का भी संचालन होता है। तापीय परियोजनाओं में कोयला संकट के कारण इस समय जल विद्युत संयंत्रों से भरपूर उत्पादन किया जा रहा है। इससे डैम का पानी भी तेजी से खिसक रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो तीन महीने के भीतर ही जल विद्युत संयंत्रों का उत्पादन बाधित भी हो सकता है।
तीन दिन में एक फीट कम हो रहा पानी
जल विद्युत के जानकारों के अनुसार अमूमन 20 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने में एक फीट पानी डिस्चार्ज होता है। जलस्तर कम होने पर डिस्चार्ज की दर और बढ़ जाती है। अभी डैम में डेडलाइन से 36 फीट अधिक पानी है। जबकि प्रतिदिन रिहंद हाइड्रो से सात मेगावाट के करीब विद्युत उत्पादन हो रहा है। रिहंद हाइड्रो के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि ओबरा की एक इकाई बंद होने के कारण इस समय परियोजना से अधिकतम 280 मेगावाट उत्पादन किया जा रहा है। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर संयंत्र से पूर्ण क्षमता से उत्पादन किया जा सकता है।
अधिकतम से तीन फीट कम भर पाया है डैम
रिहंद डैम सिंचाई प्रखंड के एक्सईएन एसके सिंह ने बताया कि वर्तमान में डैम में अधिकतम 870 फीट या 8900 क्यूबिक मीटर पानी का भराव हो सकता है। इस वर्ष डैम में अधिकतम 867 फीट ही पानी भर पाया है। जबकि पिछले वर्ष डैम का लेवल 868 फीट तक पहुंच गया था। डैम में 830 फीट तक का पानी ताप परियोजनाओं के लिए रिजर्व रखा गया है। हालांकि जलस्तर 835 फीट पहुंचते ही जल विद्युत प्रबंधन को आगाह कर दिया जाता है।